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धर्मेंद्र प्रधान को बचाने विजय शर्मा ने जज के शब्दों का झूठा सहारा लिया – डॉ. महंत

डॉ. महंत ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान किसी जज की टिप्पणी से नहीं गए। उन्हें इसलिए जाना पड़ा क्योंकि NEET सहित प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, संगठित भ्रष्टाचार, परीक्षा माफिया और सरकारी संरक्षण में पनपी अव्यवस्था ने पूरे देश का विश्वास तोड़ दिया था। लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा, परिवार सड़क पर उतरे, देशव्यापी जनाक्रोश पैदा हुआ और सरकार को आखिरकार अपने शिक्षा मंत्री की बलि देनी पड़ी। यह कहना कि एक जज के कुछ शब्दों से मंत्री का इस्तीफा हो गया, भाजपा द्वारा अपने ही भ्रष्ट और विफल तंत्र को बचाने के लिए गढ़ा गया नया झूठ है।
डॉ. महंत ने कहा कि जिस टिप्पणी का हवाला विजय शर्मा दे रहे हैं, वह भी उनके दावे को साबित नहीं करती। छात्र जंतर-मंतर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ आंदोलन नहीं कर रहे थे। उनका निशाना शिक्षा व्यवस्था में फैला भ्रष्टाचार, पेपर लीक और मोदी सरकार की जवाबदेही थी। मुख्य न्यायाधीश के “कॉकरोच” शब्द के जवाब में छात्रों ने व्यंग्य में अपने आंदोलन का नाम “कॉकरोच जनता पार्टी” रख लिया था। उन्होंने न्यायपालिका के खिलाफ आंदोलन नहीं किया, बल्कि उसी शब्द को प्रतिरोध का प्रतीक बना दिया। विजय शर्मा इतिहास को तोड़-मरोड़कर यह दिखाना चाहते हैं कि मंत्री को जनता ने नहीं, जज ने हटाया। देश का युवा इस झूठ को अच्छी तरह समझता है।
डॉ. महंत ने कहा कि कल उसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में विजय शर्मा ने राहुल गांधी को चुनौती देते हुए कहा कि “राहुल गांधी बोल रहे हैं कि गोली चला दी गई, इस बात को प्रमाणित कर दें।” अब विजय शर्मा पहले यह बताएं कि क्या वे अपनी ही सरकार के रिकॉर्ड पर भरोसा करते हैं?
सूचना के अधिकार के तहत दिल्ली के सरकारी अस्पतालों ने लिखित रूप से बताया है कि जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान पैलेट से घायल प्रदर्शनकारियों का इलाज किया गया। पहले पुलिस ने पैलेट चलाने से इनकार किया, बाद में संसद मार्ग थाने की जनरल डायरी में भी रैपिड एक्शन फोर्स द्वारा एंटी-रायट गन से राउंड फायर किए जाने का उल्लेख सामने आया। अब विजय शर्मा स्पष्ट करें कि क्या सरकारी अस्पताल झूठ बोल रहे हैं? क्या दिल्ली के थाने के सरकारी रिकॉर्ड झूठे हैं?
डॉ. महंत ने कहा कि विजय शर्मा की पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस विरोधाभासों से भरी हुई थी। एक तरफ वे कहते हैं कि “युवाओं का विरोध स्वागत योग्य है”, दूसरी तरफ उसी आंदोलन को राहुल गांधी से जोड़कर “अराजकता फैलाने की साजिश”, “युवाओं को भड़काने” और “नेपाल, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे हालात” की भाषा बोलते हैं। भाजपा पहले छात्रों को देशद्रोही बताती रही, फिर उन्हें अराजकतावादी कहा, फिर उनके ऊपर स्याही फेंकी गई, उनके साथ बदसलूकी हुई और अब जब पूरे देश का माहौल बदल गया है तो वही भाजपा कह रही है कि युवाओं का विरोध स्वागत योग्य था। यह बदलाव संवेदनशीलता का नहीं, राजनीतिक डर का प्रमाण है।
डॉ. महंत ने कहा कि भाजपा को दूसरों पर उंगली उठाने से पहले अपने नेताओं और वैचारिक सहयोगियों की भाषा पर जवाब देना चाहिए। भाजपा सांसद कंगना रनौत ने इन्हीं आंदोलनकारी युवाओं और विशेष रूप से युवा महिलाओं को “जेनरेशन गटर” कहकर अपमानित किया था।
डॉ. महंत ने कहा कि इससे भी आगे बढ़कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा से जुड़े वरिष्ठ चेहरे टी.जी. मोहनदास ने जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही छात्राओं और महिलाओं के बारे में कहा कि उन पर गोली चला देनी चाहिए, और यह तक कहा कि सेक्युलर और वामपंथी महिलाओं को बलात्कार “पसंद” होता है। यह सिर्फ एक बयान नहीं, भारतीय नारी का घोर अपमान है। यह लोकतंत्र, संविधान और महिला सम्मान, तीनों के खिलाफ मानसिकता का परिचय है।
डॉ. महंत ने विजय शर्मा से पूछा कि वे आज देश को स्पष्ट बताएं, क्या वे टी.जी. मोहनदास के इन घृणित बयानों की सार्वजनिक निंदा करते हैं? क्या वे मानते हैं कि अपने भविष्य के लिए शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रही छात्राओं के बारे में बलात्कार जैसी भाषा बोलना अपराध है? या फिर भाजपा और संघ परिवार की चुप्पी को इन विचारों का समर्थन माना जाए?
नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत ने कहा कि, जो लोग शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रही बेटियों पर स्याही फेंकते हैं, उन्हें अपशब्द कहते हैं, उन्हें “जेनरेशन गटर” बताते हैं, उनके बारे में बलात्कार जैसी घृणित बातें करते हैं और फिर लोकतंत्र का उपदेश देते हैं, उन्हें पहले आईने में अपना चेहरा देखना चाहिए।
बच्चियों पर स्याही फेंकने वालों, शर्म करो।
