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झीरम घाटी हत्याकांड पर फैसला आने से पहले कांग्रेस में हलचल, भूपेश बघेल ने NIA जांच पर उठाए सवाल…

20 hours ago
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कांकेर। बहुचर्चित झीरम घाटी हत्याकांड मामले में NIA कोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें पूरी हो चुकी है। आज 31 अगस्त को फैसला आने की संभावना थी, लेकिन आज सुनवाई के बाद NIA कोर्ट ने फैसले की तारीख आगे बढ़ा दी है। लेकिन फैसला आने से पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने NIA की जांच पर सवाल उठाए दिए हैं।

बहुचर्चित झीरम घाटी हत्याकांड को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि FIR में नामजद लोगों से पूछताछ नहीं की गई और मौके पर मौजूद कई लोगों के बयान भी नहीं लिए गए। उन्होंने कहा कि घटना के पीछे के षड्यंत्रकारियों तक पहुंचने की दिशा में जांच नहीं हुई।

बघेल ने बताया कि मुख्यमंत्री रहते उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री से जांच राज्य सरकार को सौंपने की मांग की थी। SIT गठित करने पर NIA हाईकोर्ट पहुंच गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान भाजपा सरकार ने भी मामले की आगे जांच के लिए कोई कदम नहीं उठाया, जिससे लगता है कि भाजपा मामले को दबाना चाहती है।

टीएस सिंहदेव ने सुरक्षा पर उठाए थे सवाल

इसके पहले पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने भी घटनाक्रम को लेकर बड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि वे खुद इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी रहे हैं, और जगदलपुर पहुंचकर NIA के सामने अपनी आंखों देखी घटना का बयान दर्ज करा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि घटना वाले दिन पूरे इलाके में पुलिस की मौजूदगी लगभग शून्य थी। रास्ते में कहीं भी पर्याप्त फोर्स तैनात नहीं थी. उन्होंने कहा कि उनके बयान में घटना से जुड़े सभी अहम पहलुओं को दर्ज कराया गया है। अगर जांच और फैसले में इन तथ्यों को जगह मिलती है, और इस घटना के लिए जिम्मेदारी भी तय होती है, तभी पीड़ितों और कांग्रेस नेताओं को न्याय मिलने का संतोष होगा।

झीरम घाटी हत्याकांड

25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा सुकमा से जगदलपुर लौट रही थी। इसी यात्रा के दौरान दरभा झीरम घाटी में घात लगाए नक्सलियों ने कांग्रेस नेताओं के काफिले पर हमला कर दिया।

इस हमले में कांग्रेस की उस दौर की एक पूरी राजनीतिक पीढ़ी खत्म हो गई। इस बड़े नक्सली हमले में बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा, तत्कालीन PCC अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, वरिष्ठ नेता विद्याचरण शुक्ल, उदय मुदलियार समेत कांग्रेस के कई प्रमुख नेताओं के साथ कई सुरक्षा बल के जवान और आम लोगों की भी मौत हुई थी।

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