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शिक्षा व्यवस्था बदहाल: नए स्कूल भवन का निर्माण अब तक नहीं हुआ पूरा, कचरा संग्रहण केंद्र, रंगमंच और सामुदायिक भवनों में पढ़ने को मजबूर बच्चे

8 hours ago
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मोहला-मानपुर। छत्तीसगढ़ के मोहला मानपुर जिले में शाला भवनों का अभाव बदहाल शिक्षा व्यवस्था का बड़ा कारण बना हुआ है। जिला प्रशासन की कमजोरी और शिक्षा विभाग के गैर जिम्मेदाराना रवैये ने इस ग्रामीण और आदिवासी बाहुल्य जिले में शिक्षा व्यवस्था का इस कदर बेड़ागर्क कर रखा है कि नौनिहालों की तालीम खुले रंग मंच और छोटे-छोटे सामुदायिक भवनों में सिमट कर रह गई है।

शाला भवनों की उपलब्धता में जिला प्रशासन की नाकामी ने शिक्षा के लिए मासूम बच्चों को खतरों के बीच झोंक दिया है। वहीं जिला प्रशासन के उच्चाधिकारी और जिम्मेदार जनप्रतिनिधि तमाशबीन बने हुए हैं। विडंबना ही कहें कि जिला पंचायत में शिक्षा समिति के सभापति और क्षेत्र में सत्तारूढ़ भाजपा के जिला पंचायत सदस्य के निर्वाचन क्षेत्र औंधी में सबसे ज्यादा व्यवस्था खराब है।

कचरा संग्रहण केंद्र, रंगमंच और सामुदायिक भवनों में चल रहा स्कूल

औंधी तहसील अंतर्गत ग्राम आलकन्हार में बीते 5 वर्षों से एक खुले रंगमंच में शाला लग रही है। इसी तरह 4 से 5 वर्ष बीतने को है ग्राम मार्चुल व घोडाझरी तथा ग्राम हुरेली में महज एक कमरा वाले छोटे-छोटे गुमटीनुमा सामुदायिक भवन में शाला संचालन हो रहा है। इसी इलाके के ग्राम बालेर में तो शिक्षा व्यवस्था का स्तर इस कदर गिरा दिया गया है कि करीब तीन साल से यहां के बच्चे टीन से बने कचरा संग्रहण केंद्र में बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं।

डेढ़-दो साल बाद भी पूरा नहीं हुआ निर्माण

इसके अलावा और भी कई ऐसे स्कूल हैं जहां जर्जर भवनों में जान जोखिम में डालकर बच्चे अध्यापन करते हैं। इन सभी गांवों में नवीन शाला भवन के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। वहीं जिन भवनों को स्वीकृति मिल गई है उन भवनों का प्रशासनिक उदासीनता के चलते डेढ़ से दो साल बाद भी निर्माण पूरा नहीं हो सका है।

कमजोर व लापरवाह प्रशासनिक व्यवस्था

पहले तो प्रशासन ने शाला भवनों के निर्माण की स्वीकृति पाने में देरी की और अब जबकि कुछ जगहों में शाला निर्माण शुरू हो भी गया है, तो प्रशासन समय में निर्माण पूरा कराने में भी नाकाम दिख रहा है। यही वजह है कि जिले की कमजोर व लापरवाह प्रशासनिक व्यवस्था के चलते क्षेत्र के आदिवासी नौनिहालों का भविष्य कचरा संग्रहण केंद्र, सामुदायिक भवन और रंग मंच में कैद हो जाने को मजबूर हो गया है।

लंबे समय से भवनों की जर्जता और भवनों का अभाव

बता दें जिले में 50 से अधिक शाला भवन जर्जर हैं। बच्चे खतरों भरा अध्यपन स्कूल मे करने को मजबूर हैं। वहीं जिले के शिक्षा अधिकारी अभी भी शासन को भवन का प्रस्ताव भेजे जाने की दुहाई दे रहे हैं, जबकि भवनों की जर्जता और भवनों का अभाव लंबे समय की समस्या है।

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