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वर्ष 2020 में कांग्रेस नेता के 51 एकड़ जमीन पर अवैध प्लाटिंग करने से शुरू हुआ नकटी विवाद, भाजपा का दावा

10 hours ago
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नवा रायपुर के नकटी गाँव में वर्ष 2021 से 2023 के बीच शासकीय भूमि पर अतिक्रमण तीन हेक्टेयर से बढ़कर 15 हेक्टेयर तक पहुँच गया। हाउसिंग बोर्ड का आरोप है कि भूमि आवंटन की भनक लगते ही मुआवजे के लालच में अवैध कब्जे किए गए। वहीं, पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने भाजपा सरकार पर जनहित की योजना को बदल कर विधायकों और सांसदों के लिए विशेष कॉलोनी बनाने का आरोप

रायपुर। नकटी गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर जारी राजनीतिक घमासान के बीच भाजपा ने कांग्रेस पर हमला बोला है। भाजपा प्रदेश महामंत्री डा. नवीन मार्कण्डेय और प्रदेश प्रवक्ता गौरीशंकर श्रीवास ने आरोप लगाया कि नकटी विवाद की पृष्ठभूमि वर्ष 2020 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान तैयार हुई। उनका दावा है कि हाउसिंग बोर्ड की आवासीय कालोनी प्रस्तावित होने की जानकारी मिलते ही कांग्रेस के एक फरार नेता ने 51 एकड़ जमीन खरीदकर अवैध प्लाटिंग की तैयारी की, जिसके बाद क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण बढ़ा।

भाजपा प्रदेश कार्यालय में शनिवार को पत्रकार वार्ता में डा. मार्कण्डेय ने कहा कि वर्ष 2020 में हाउसिंग बोर्ड ने आवासीय कालोनी के लिए भूमि चिन्हित की थी। उस समय लगभग तीन हेक्टेयर भूमि पर कब्जा था, जो बाद में बढ़कर करीब 15 हेक्टेयर हो गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कई लोगों ने नियमानुसार मिलने वाली ढाई डिसमिल भूमि के बजाय 10 से 20 हजार वर्गफीट तक सरकारी जमीन पर कब्जा कर मकान और बाड़ी बना ली।

पुर्नवास पर काम कर रही सरकार

प्रदेश प्रवक्ता गौरीशंकर श्रीवास ने कहा कि वर्तमान सरकार पात्र परिवारों के पुनर्वास की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि 29 जून को 61 परिवारों को नया रायपुर के सेक्टर-30 में आवास आवंटित कर पुनर्वास किया गया। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर ग्रामीणों को गुमराह कर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया और कहा कि जब पूरी प्रक्रिया चल रही थी, तब कांग्रेस अदालत क्यों नहीं गई। उन्होंने दावा किया कि नकटी को लेकर विपक्ष झूठा नैरेटिव गढ़कर राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है।

भूपेश के कार्यकाल मे पांच गुना बढ़ा अतिक्रमण

नवा रायपुर के नकटी (सम्मानपुर) गांव में भूपेश सरकार के कार्यकाल के दौरान तीन वर्षों में पांच गुना अतिक्रमण बढ़ गया। विभागीय रिपोर्ट से इस बात की जानकारी स्पष्ट हो रही है कि वहां सुनियोजित तरीके से अतिक्रमण किया गया। वर्ष 2021 में पटवारी व राजस्व निरीक्षकों ने वहां करीब तीन हेक्टेयर क्षेत्र में कच्चे मकान और बाड़ी स्वरूप अतिक्रमण पाया था। इस बीच वर्ष-2023 तक करीब 15 हेक्टेयर क्षेत्र में पक्के मकान बनाकर अतिक्रमण कर लिया गया। भूमि आवंटन और चिन्हांकन की जानकारी मिलते ही मुआवजे की उम्मीद में तत्कालीन पूर्व सरपंच की मिलीभगत से चारागाह भूमि पर कब्जे शुरू हो गए। सरकार की ओर से भूमि आवंटन और राजस्व प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों के साथ दावा किया गया है कि 77 लोगों ने 15 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा किया था। इसमें पांच हजार स्क्वेयर से लेकर 10 हजार स्क्वेयर फीट से अधिक की भूमि शामिल थीं।

भाजपा ने योजना का स्वरूप बदला : अकबर

आवास एवं पर्यावरण विभाग के पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने दावा किया है कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में नकटी गांव में विधायक या सांसदों की कालोनी बनाने की कोई योजना नहीं थी। उस समय गृह निर्माण मंडल ने केवल सामान्य आवास योजना के लिए भूमि मांगी थी, लेकिन जैसे ही यह जानकारी मिली कि प्रस्तावित भूमि पर लोग वर्षों से निवासरत हैं, तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने निर्णय लिया था कि अतिक्रमण हटाकर लोगों को बेघर नहीं किया जाएगा। कांग्रेस सरकार की प्रस्तावित योजना कुछ वर्गों के शासकीय कर्मचारियों के लिए सामान्य आवास निर्माण की थी, न कि जनप्रतिनिधियों के लिए विशेष कालोनी विकसित करने की। उन्होंने आरोप लगाया कि दिसंबर-2023 में भाजपा सरकार बनने के बाद योजना का स्वरूप पूरी तरह से बदल दिया गया।

सचिव के चार अक्टूबर 2024 के पत्र में पहली बार किया गया उल्लेख

पूर्व मंत्री ने दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया कि कांग्रेस सरकार के समय गृह निर्माण मंडल ने 15.47 हेक्टेयर (करीब 38 एकड़) भूमि की मांग की थी। लेकिन, भाजपा सरकार बनने के कुछ महीनों के भीतर गृह निर्माण मंडल के आयुक्त ने 25 सितंबर 2024 को भूमि आवंटन के संबंध में आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव को पत्र भेजा था। चार अक्टूबर 2024 को सचिव के हस्ताक्षर से रायपुर कलेक्टर को भेजे गए पत्र में पहली बार उल्लेख किया गया कि सांसदों व विधायकों के लिए आवास उपलब्ध कराने के लिए 29.172 हेक्टेयर (करीब 72 एकड़) भूमि की आवश्यकता है।

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