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किसानों के साथ बड़ा धोखा? आधार बीज की बोरियों से निकल रहा करगा, फसल पर मंडराया खतरा

7 hours ago
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आरंग। खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही किसानों के बीच धान बीज की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है। आरंग क्षेत्र की कुछ कृषि साख सहकारी समितियों से वितरित किए जा रहे धान के आधार बीज (फाउंडेशन सीड) में ‘करगा’ या अवांछित बीज मिलने की शिकायतें सामने आई हैं। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते इसकी जांच नहीं की गई तो इससे फसल उत्पादन और कृषि लागत दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

किसानों के अनुसार, छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के माध्यम से सहकारी समितियों में उपलब्ध कराए जा रहे कुछ आधार बीज के पैकेटों में धान के साथ अवांछित बीज और कचरा जैसी सामग्री भी दिखाई दे रही है। इसको लेकर किसानों ने बीज की गुणवत्ता और उसकी जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

बुआई के समय खुलती है बोरी, बढ़ सकती है परेशानी

ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश किसान बीज खरीदने के बाद उसे सीधे बुआई या थरहा (नर्सरी) तैयार करने के समय ही खोलते हैं। ऐसे में यदि बीज के साथ करगा या अवांछित घास के बीज मिले हों तो वे सीधे खेतों में पहुंच जाएंगे।

कृषि जानकारों के अनुसार, खेतों में करगा उगने से मुख्य फसल को पोषण और स्थान के लिए प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। इससे फसल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और किसानों को अतिरिक्त निंदाई एवं खरपतवार नियंत्रण पर खर्च करना पड़ सकता है। साथ ही अंकुरण क्षमता प्रभावित होने पर उत्पादन में भी कमी आने की आशंका रहती है।

किसानों को दी जा रही सावधानी बरतने की सलाह

किसान संगठनों और स्थानीय किसानों ने बीज खरीदने वाले किसानों से अपील की है कि वे बुआई से पहले बीज की बोरी खोलकर उसकी अच्छी तरह जांच करें। यदि बीज में करगा, खरपतवार या अन्य अवांछित सामग्री दिखाई दे तो इसकी जानकारी तत्काल संबंधित समिति प्रबंधक, कृषि विभाग अथवा बीज वितरण एजेंसी को दें।

किसानों का कहना है कि समय रहते शिकायत दर्ज कराने से संभावित नुकसान को रोका जा सकता है और दोषपूर्ण बीज की पहचान भी आसान होगी।

गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था पर उठे सवाल

आधार बीज को बीज उत्पादन श्रृंखला का सबसे महत्वपूर्ण और शुद्ध स्तर माना जाता है। यही बीज आगे चलकर प्रमाणित बीज उत्पादन का आधार बनता है। ऐसे में किसानों का सवाल है कि यदि शिकायतें सही हैं तो ग्रेडिंग, परीक्षण और प्रमाणीकरण की प्रक्रिया के दौरान ऐसी खामियां कैसे रह गईं।

किसानों ने मांग की है कि संबंधित बीज लॉट की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच कराई जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि किसानों तक केवल मानक गुणवत्ता वाला बीज ही पहुंचे।

जांच और कार्रवाई की मांग

किसानों ने राज्य सरकार, कृषि विभाग और संबंधित एजेंसियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही जिन किसानों को कथित रूप से खराब गुणवत्ता वाला बीज मिला है, उन्हें गुणवत्तायुक्त बीज उपलब्ध कराने तथा दोषी पाए जाने पर जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करने की भी मांग उठाई है।

किसानों का कहना है कि खरीफ सीजन कृषि कार्यों का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है और इस दौरान बीज की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता सीधे किसानों की आय और उत्पादन को प्रभावित कर सकता है।

 

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