• Chhattisgarh
  • लोकल से ग्लोबल हुई छत्तीसगढ़ की खेल प्रतिभाएं, CM साय का अटल संकल्प ला रहा रंग

लोकल से ग्लोबल हुई छत्तीसगढ़ की खेल प्रतिभाएं, CM साय का अटल संकल्प ला रहा रंग

14 hours ago
35

रायपुर. खेल प्रतिभाओं से धनी छत्तीसगढ़ में केवल इन प्रतिभाओं को पहचानने, उन्हें सही प्रशिक्षण देने और बड़े मंच तक पहुंचाने की जरूरत थी. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इस दिशा में योजनाबद्ध प्रयासों को आगे बढ़ाया है. मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान इसी सोच का महत्वपूर्ण हिस्सा है.

प्रदेश के मुख्यमंत्री साय का कहना है कि खेल प्रतियोगिता जीतने का माध्यम होने के साथ-साथ अनुशासन, परिश्रम, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व निर्माण का ज़रिया भी है. इस दिशा में सरकार का प्रयास प्रतिभा की पहचान से लेकर प्रशिक्षण, आधुनिक संसाधन, अधोसंरचना और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय अवसरों तक एक समग्र व्यवस्था तैयार करना है.

गांव और जनजातीय अंचलों से निकल रही बड़ी प्रतिभाएं

छत्तीसगढ़ के दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं की अपार संभावनाएं दिखाई देती हैं. छत्तीसगढ़ में होने वाले बस्तर ओलंपिक इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार बस्तर संभाग के सात जिलों में आयोजित प्रतियोगिताओं में पिछले आयोजनों में अब तक 3.91 लाख से अधिक खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया. सरगुजा ओलंपिक ने भी स्थानीय युवाओं की खेल प्रतिभा को पहचान कर उनको खेल के स्तरीय मैदान तक पहुंचने का अवसर दिया है. प्रदेश में होने वाले ऐसे आयोजनों के माध्यम से ग्रामीण और जनजातीय युवाओं को अपनी क्षमता दिखाने का मंच मिल रहा है. राज्य के खेल जगत में होने वाले इस उत्थान का श्रेय प्रदेश की जनता अपने लाड़ले मुख्यमंत्री ‘विष्णु भैय्या’ को देती है. मुख्यमंत्री की मंशा भी साफ़ है कि युवाओं को अवसर मिले, उनकी प्रतिभा गांव की सीमा में न रुके और मेहनत करने वाले बेटे-बेटियों को आगे बढ़ने का रास्ता मिले.

खेलों के लिए बढ़ता बजट और बदलती अधोसंरचना

वित्तीय वर्ष 2026-27 में खेल एवं युवा कल्याण विभाग का बजट 304 करोड़ रुपए किया गया है. साथ ही मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान है. ग्रामीण और ब्लॉक स्तर के खेल क्लबों को आधारभूत सामग्री और वित्तीय सहायता देने के लिए छत्तीसगढ़ क्रीड़ा प्रोत्साहन योजना में 57 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं. प्रदेश के कुनकुरी, रायगढ़ और रायपुर में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स विकसित किए जा रहे हैं. नवा रायपुर में लगभग 67 करोड़ रुपए की लागत से तीरंदाजी अकादमी और पंडरापाट में पहाड़ी कोरवा समुदाय की प्राकृतिक तीरंदाजी प्रतिभा को निखारने के लिए लगभग 18 करोड़ रुपए की अकादमी विकसित करने की जानकारी भी दी गई है.

सम्मान के साथ भविष्य की सुरक्षा

किसी भी खिलाड़ी के लिए सम्मान जितना महत्वपूर्ण होता है उतना ही महत्वपूर्ण उसका भविष्य भी होता है. राज्य खेल अलंकरण के माध्यम से उत्कृष्ट खिलाड़ियों और कुशल प्रशिक्षकों को सम्मानित किया जा रहा है. वर्ष 2026 में 666 खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को 1.74 करोड़ रुपए से अधिक की पुरस्कार और प्रोत्साहन राशि दिए जाने का उल्लेख है. प्रदेश के मुख्यमंत्री ने 156 उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सूची जारी कर उनके लिए शासकीय सेवा में नियुक्ति का रास्ता खोलने की जानकारी दी. ऐसी पहल से खेल को करियर के रूप में देखने वाले युवाओं के लिए रोजगार और भविष्य की सुरक्षा का एक अतिरिक्त रास्ता बनता है.

हॉकी से लेकर ओलंपिक तक बढ़ता छत्तीसगढ़

हॉकी को नई पहचान देने के लिए छत्तीसगढ़ में राज्य स्तरीय हॉकी लीग की तैयारी भी की गई है. छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय हॉकी में छह फ्रेंचाइजी टीमें भाग लेंगी और प्रत्येक टीम में स्थानीय खिलाड़ियों के साथ राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर के मार्की खिलाड़ी शामिल होंगे. दीर्घकालिक लक्ष्य 2036 ओलंपिक के लिए राज्य से विश्वस्तरीय खिलाड़ी तैयार किया जाना है.

केंद्र की पहल और राज्य के प्रयास से मिल रही बड़ी सफलता

क्रीड़ा के क्षेत्र में केंद्र सरकार की खेलो इंडिया जैसी शुरुआत ने देशभर में खेल प्रतिभाओं के लिए अवसर और प्रतिस्पर्धी वातावरण तैयार करने का काम किया है. केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू द्वारा भी खेलो इंडिया से बने सकारात्मक वातावरण और उसके द्वारा छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को मिलने वाले लाभ का उल्लेख है. इसी व्यापक जनभागीदारी की भावना को वर्तमान में केंद्र सरकार की 2026 की ‘सेवा संकल्प’ गतिविधियों से भी जोड़ा जा सकता है.

युवाओं के सपनों को मिल रहे नए पंख

खेल और खिलाड़ी भावना खेल के मैदानों से इतर युवाओं को अनुशासन, आत्मविश्वास और सकारात्मक दिशा देने का माध्यम भी है. बस्तर से सरगुजा तक खेल आयोजनों में बढ़ती भागीदारी में यह बदलाव स्पष्ट देखी जा सकती है जो इस दिशा में महत्वपूर्ण आधार बन सकती है.

जन-जन के प्रिय विष्णु भैय्या और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा प्रतिभा पहचान, प्रशिक्षण, अधोसंरचना, सम्मान और रोजगार के अवसरों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है. केंद्र की खेल और जनभागीदारी से जुड़ी शुरुआत के साथ राज्य की योजनाएं प्रदेश के युवाओं के लिए नए अवसरों का आधार तैयार कर रही हैं.

इस बदले हुए परिवेश में ‘विष्णु भैय्या’ का नाम उस राजनीतिक-जनसंपर्क शैली का प्रतीक है, जिसमें सरकार और युवाओं के बीच संवाद और अवसरों को प्रमुखता दी जा रही है. पूरी-पूरी कोशिश की जा रही है कि इन योजनाओं का लाभ प्रदेश के अंतिम छोर तक पहुंचे और मैदान में पसीना बहाने वाली हर प्रतिभा को अपनी क्षमता साबित करने का अवसर मिले. निस्संदेह किसी भी प्रदेश का भविष्य सिर्फ़ उसकी प्राकृतिक संपदा नहीं होती बल्कि किसी भी राज्य का भविष्य उसके युवाओं की प्रतिभा, मेहनत और सपनों से बनता है. छत्तीसगढ़ के खेल मैदानों से निकलने वाली नई खिलाड़ियों की नई पौध यदि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचती है तो वह वह पूरे प्रदेश की पहचान और गौरव से जुड़ी उपलब्धि होगी.

Social Share

Advertisement