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राजनीतिक हवाबाजी : एक बार फिर साय मंत्रिमंडल में फेरबदल की चर्चा !

रायपुर। राजनीति में अफवाहों का बाजार गर्म ही रहता है. कयासों के अधार पर खबरें बनती और चलती रहती हैं. कभी-कभी ऐसी चर्चाओं को बल तब और मिलने लगता है, जब आस-पास उथल-पुथल मची हो और अचानक से कुछ हो जाने की आशंका बनी हुई हो. छत्तीसगढ़ में इन दिनों कुछ ऐसी आशंका बनी हुई है. और इसी आशंका के बीच एक बार फिर साय मंत्रिमंडल में फेरबदल की चर्चा पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मीडिया में होने लगी है.
दरअसल इस बार इस चर्चा को थोड़ा बल इसलिए मिला है क्योंकि भाजपा प्रदेश संगठन में भी बदलाव की चर्चा चल पड़ी है. वहीं इन चर्चाओं के बीच मोदी मंत्रिमंडल में होने वाले फेरबदल से भी इसे जोड़कर देखा जा रहा है. कहा जा रहा है कि मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल से केन्द्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू प्रभावित हो सकते हैं. तोखन साहू से इस्तीफा लिया जा सकता और उन्हें प्रदेश भाजपा की कमान सौंपी जा सकती है. तोखन की जगह छत्तीसगढ़ के अन्य किसी सांसद को मोदी कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है.
इस संभावित और कयासों पर आधारित केंद्रीय चर्चा ने राज्य में साय मंत्रिमंडल फेरबदल को हवा दे दी है. कहा जा रहा है कि ऐसा हुआ तो छत्तीसगढ़ में साय सरकार में समीकरण बदल जाएगा. कैबिनेट में शामिल कुछ चेहरे बदल दिए जाएंगे. साथ ही विभागों में व्यापक फेरबदल किया जाएगा.
हवाबाजी वाली इस चर्चा में बने रहने के लिए आइये जरा साय मंत्रिमंडल की संरचना एक बार फिर समझते हैं.
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित कुल 14 मंत्री हैं. इनमें दो उपमुख्यमंत्री हैं. मंत्रिमंडल में शामिल सदस्यों में रामविचार नेताम, केदार कश्यप और दयालदास बघेल भाजपा के वरिष्ठ नेता और रमन सरकार में मंत्री रह चुके अनुभवी चेहरे हैं. अन्य सभी नेता पहली बार के मंत्री हैं.
अब जरा सामाजिक संतुलन को समझिए-
जनजातीय(आदिवासी वर्ग) से मुख्यमंत्री विष्णुवेदव साय, कृषि मंत्री रामविचार नेता और वन मंत्री केदार कश्यप.
अनुसूचित जाति वर्ग से खाद्य मंत्री दयालदास बघेल और गुरु खुशवंत साहब. ओबीसी वर्ग से उपमुखमंत्री अरुण साव, उद्योग मंत्री लखन देवांगन, स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े. सामान्य वर्ग से उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल. क्षेत्रीय संतुलन की बात करे तो इसे लोकसभा के हिसाब देखना उचित होगा.
छत्तीसगढ़ लोकसभा की कुल 11 सीटें और 90 विधानसभा सीटें हैं. इन 11 सीटों में रायपुर और दुर्ग लोकसभा में कुल विधानसभा सीटें हैं अन्य 9 लोकसभा में 8-8 विधानसभा सीटें शामिल हैं.
- रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र से मुख्यमंत्री साय और वितमंत्री चौधरी शामिल हैं.
- सरगुजा लोकसभा क्षेत्र से कृषि मंत्री नेताम, संस्कृति मंत्री अग्रवाल और महिला मंत्री राजवाड़े शामिल हैं.
- कोरबा लोकसभा क्षेत्र से स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल और उद्योग मंत्री देवांगन शामिल हैं.
- बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र से उपमुख्यमंत्री साव शामिल हैं.
- दुर्ग लोकसभा क्षेत्र से खाद्य मंत्री बघेल शामिल हैं.
- राजनांदगांव लोकसभा क्षेत्र से उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा शामिल हैं.
- रायपुर लोकसभा क्षेत्र से राजस्व मंत्री वर्मा और गुरु खुशवंत साहब शामिल हैं.
- बस्तर लोकसभा क्षेत्र से वन मंत्री कश्यप शामिल हैं.
सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण के वर्गीकरण पर यह पता चलता है कि साय सरकार के संतुलन कुछ हद तक असंतुलन की स्थिति है. एसटी और एससी वर्ग का सामाजिक संतुलन तो ठीक है, लेकिन ओबीसी और सामान्य वर्ग के बीच थोड़ा असंतुलन की स्थिति है. साय सरकार में ओबीसी वर्ग से सर्वाधिक 7 मंत्री हैं, जबकि सामान्य वर्ग से सिर्फ दो मंत्री हैं. अल्पसंख्यक वर्ग मौजूदा सरकार में अभी तक बाहर है. जबकि जोगी मंत्रिमंडल से लेकर रमन सरकार और भूपेश बघेल मंत्रिमंडल तक अल्पसंख्यक वर्ग का प्रतिनिधित्व रहा है. ऐसी स्थिति में सामान्य वर्ग और अल्पसंख्यक वर्ग से 1-1 मंत्री बढ़ाने की स्थिति बन रही है.
वहीं क्षेत्रीय समीकरण पर नजर डाले तो कांकेर और महासमुंद लोकसभा क्षेत्र से कोई प्रतिनिधित्व नहीं है. यह असंतुलन अभी बना हुआ है. यहाँ संतुलन बनाने की कोशिश साय सरकार कर सकती है.
क्या है चर्चा ?
सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन के साथ ही मंत्रियों के काम-काज के आंकलन के साथ साय सरकार जिस फेरबदल की चर्चा है उसे अब इस तरह समझिए.
समाजिक और क्षेत्रीय संतुलन और काम-काज के हिसाब से दोनों उपमुख्यमंत्री साय सरकार बने रहेंगे. विभागों में फेरबदल संभावित है.
वरिष्ठता और अनुभव के लिहाज से सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन में नेताम और कश्यप प्रभावित नहीं होंगे.
नए-नए मंत्री बने गुरु खुशवंत, राजेश और गजेन्द्र भी जातीय और क्षेत्रीय समीकरण में सधे रहेंगे.
और इसी क्रम में ओबीसी वर्ग से आने वाले वित मंत्री चौधरी और स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल अपनी भूमिका बरकरार रखेंगे.
लेकिन संभावित फेरबदल में जिन मंत्रियों के प्रभावित होने की चर्चा है उनमें- ओबीसी वर्ग से आने वाले लखन देवांगन, टंकराम वर्मा और लक्ष्मी राजवाड़े सहित एससी वर्ग से आने वाले वरिष्ठ नेता दयालदास बघेल शामिल हैं. हालांकि बघेल दुर्ग लोकसभा क्षेत्र से आने वाले अकेले मंत्री हैं. साथ ही एससी वर्ग के सबसे वरिष्ठ नेता. इन परिस्थितियों में यह संभव है कि साय सरकार में उनकी मौजूदगी बनी रहे इससे इंकार नहीं किया जा सकता.
चर्चा है कि साय सरकार में मौजूदा 7 ओबीसी मंत्री पद को घटाकर 4 किया जा सकता है. और इसमें एक सामान्य, एक अल्पसंख्यक और आदिवासी कोटे को जोड़ा सकता है. ऐसी स्थिति में कोरबा और सरगुजा से एक-एक कम हो जाएंगे. रायपुर लोकसक्षा क्षेत्र से घटाया गया तो उसे महामसुंद लोकसभा क्षेत्र में जोड़ा जा सकता है. हालांकि ऐसी संभावना है कि रायपुर लोकसभा क्षेत्र से अल्पसंख्यक कोटा को भरा जाएगा.
फिलहाल जब तक अधिकारिक तौर पर कहीं से कोई बयान न आ जाए तब तक चर्चाओं का आनंद लेते रहिए. समीकरण बनाते और बिगाड़ते रहिए. राजनीतिक हवाबाजी में कयास लगाते रहिए. अफवाहों पर ध्यान दीजिए क्योंकि हर अफवाह झूठ हो यह जरूरी नहीं. कभी-कभी चर्चाओं से निकली खबर भी सच हो जाती है.