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रायपुर नगर निगम में अधिकारी बनाम जनप्रतिनिधि! सभापति सूर्यकांत राठौर ने कहा- ईगो से हो रहा नुकसान, महापौर चौबे बोलीं- समन्वय की कमी

4 hours ago
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 रायपुर। राज्य की राजधानी और प्रदेश के सबसे बड़े नगर निगम में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच चल रही खींचतान अब सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गई है। 15 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस समारोह में निगम मुख्यालय के ध्वजारोहण मंच से सभापति सूर्यकांत राठौर ने जो कहा, वह सिर्फ बयान नहीं, बल्कि लंबे अनुभव से निकला दर्द था। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि रायपुर को अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के ईगो से बड़ा नुकसान हो रहा है। उन्होंने यह बयान 15 अगस्त, स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित समारोह में कही थी।

25 साल के कार्यकाल में पहली बार बनी अराजकता की स्थिति- सभापति

लल्लूराम डॉट कॉम से बातचीत में सभापति सूर्यकांत राठौर ने कहा कि सभी ईगो पाले हुए बैठे हैं। इससे शहर को नुकसान हो रहा है। मेरे 25 साल के कार्यकाल में पहली बार निगम में अराजकता की स्थिति बनी है। उन्होंने याद दिलाया कि पहले तीन बार कांग्रेस और दो बार भाजपा के शासनकाल में वे पार्षद, एमआईसी सदस्य और नेता प्रतिपक्ष रहे, लेकिन कभी ऐसी स्थिति नहीं बनी थी। पिछले कुछ महीनों में जनप्रतिनिधियों के खिलाफ अधिकारियों द्वारा थाने में एफआईआर दर्ज कराने की घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कई मसले बातचीत से सुलझाए जा सकते थे, लेकिन संवादहीनता के कारण मामला अदालत और थाने तक पहुंच रहा है।

सभापति का स्पष्ट कहना था, ताली दोनों हाथों से बजती है। किसी का हाथ छोटा या बड़ा हो, इससे फर्क नहीं पड़ता। नगर निगम लड़ाई के लिए नहीं, जनता के लिए है। यहां आम आदमी से लेकर बड़े वर्ग तक जुड़े हैं। लड़ाई नहीं, समन्वय की जरूरत है। ईगो रखने से पहले खुद को नुकसान होता है।

उन्होंने सेवानिवृत्त अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति का जिक्र करते हुए भावुक होते हुए कहा कि पुराने लोग निगम को परिवार की तरह मानते थे। अब वैसा लगाव और जुड़ाव गायब होता दिख रहा है। बात कहने का नहीं है, लेकिन क्या करें, अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है। उनका यह वाक्य मंच पर मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

समन्वय की जरूरत- महापौर

महापौर मीनल चौबे ने स्थिति को लड़ाई बताने से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि नगर निगम में लड़ाई की कोई स्थिति नहीं है। बस जरूरत समन्वय की है। सभी मिलकर काम कर रहे हैं। भाषा में संयम रखने की जरूरत है, चाहे जनप्रतिनिधि हों या अधिकारी।

सभापति ने जो कहा, अपने अनुभव के आधार पर कहा- नेता प्रतिपक्ष

नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने सभापति के बयान का समर्थन किया है। उन्होंने कहा, सभापति ने मंच से जो कहा, वो सत्य है। उनके 25 साल के लंबे अनुभव के आधार पर कहा गया है। ईगो सब कुछ बर्बाद कर रहा है। अधिकारी और जनप्रतिनिधि एक सिक्के के दो पहलू हैं। सभी को मिलकर चलने की जरूरत है, तभी विकास हो पाएगा। हाल के महीनों की खींचतान निराशाजनक है। सभापति द्वारा सुझाए रास्ते पर चलने की जरूरत है।

रायपुर नगर निगम प्रदेश का सबसे बड़ा निकाय है। यहां से निकलने वाला संदेश अन्य निकायों के लिए मापदंड बनता है, लेकिन वर्तमान परिषद की कार्यप्रणाली इस कसौटी पर खरी नहीं उतर रही है। सभापति का मंच से किया गया यह खुलासा सिर्फ एक भाषण नहीं, बल्कि चेतावनी भी है कि अगर ईगो और संवादहीनता बनी रही तो शहर का विकास और आम जनता दोनों प्रभावित होंगे।

अब सवाल यह है कि क्या अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय की वह कड़ी जुड़ पाएगी, जिसकी जरूरत सभापति, महापौर और नेता प्रतिपक्ष तीनों ने महसूस की है? या फिर एफआईआर और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी रहेगा? रायपुर का भविष्य इस जवाब पर निर्भर करता है।

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