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वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में प्रधानमंत्री ने जांजगीर-चांपा कलेक्टर से पूछा था कितने गांव कोरोना मुक्त, अब सरकार ने बताया 9462 गांवों में कोई केस नहीं

रायपुर, 27 मई 2021/ पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री ने देश भर के चुनिंदा जिला कलेक्टरों से कोरोना प्रबंधन पर चर्चा की थी। उस दिन उन्होंने जांजगीर-चांपा कलेक्टर यशवंत कुमार से पूछा था कि उनके जिले में कितने गांव है। और कितने गांव कोरोना से मुक्त हैं। कलेक्टर इसका जवाब नहीं दे पाए थे। अब राज्य सरकार उस सवाल का जवाब निकालकर लाई है। दावा है कि प्रदेश के 9 हजार 462 गांवों में कोरोना का एक भी केस नहीं है।
राज्य सरकार की ओर से बताया गया, प्रदेश के कुल 20 हजार 92 गांवों में से 9 हजार 462 गांवों में कोरोना पहुंचा ही नहीं अथवा वह गांव कोरोना संक्रमण से उबर चुका है। इन गांवों में अब कोरोना का एक भी केस नहीं है। इस सूची में जांजगीर-चांपा जिले के 150 गांव भी शामिल हैं। जांजगीर-चांप जिले में कुल 887 गांव हैं। रायपुर के 478 में से 261 गांव कोरोना संक्रमण से मुक्त हैं। सबसे बेहतर तस्वीर दुर्ग जिले से सामने आ रही है। कभी सबसे बुरी तरह प्रभावित इस जिले के 385 में से 377 गांव अब पूरी तरह कोरोना से मुक्त हो चुके हैं। सरकार का दावा है कि ऐसा कोरोना प्रबंधन की कुशल नीतियों की वजह से संभव हो पाया है।
पांच प्रतिशत से नीचे आई पॉजिटिविटी दर
पिछले 20-25 दिनों में कोरोना के नए मामलों में तेजी से गिरावट आई है। बुधवार को प्रदेश में 60 हजार 171 सैम्पल लिए गए। इसकी तुलना में केवल 2 हजार 829 नए मरीज सामने आए। इस मान से पॉजिटिविटी रेट 4.7 प्रतिशत हुआ है। ऐसा सुधार दो महीने बाद दिखा है। बुधवार को कुल 5 हजार 97 लोग ठीक भी हुए। अब प्रदेश में सक्रिय मरीजों की संख्या 53 हजार 480 रह गई है।
मौतों का आंकड़ा भी घटा है
बुधवार को प्रदेश भर में 56 लोगों की मौत हुई। इनमें से 30 को कोरोना के साथ दूसरी गंभीर बीमारियां भी थीं। सबसे अधिक 11 मौत रायगढ़ जिले में हुई। वहीं बिलासपुर और महासमुंद के 8-8 मरीजों की जान गई। महीने की शुरुआत में एक दिन में 100 से अधिक मरीजों की मौत होती रही थी। कोरोना की वजह से अब तक प्रदेश के 12 हजार 779 लोगों की जान जा चुकी है।
गांवों को बचाने के लिए सरकार ने क्या किया
अधिकारियों ने बताया, नगरीय क्षेत्रों में कोरोना की दूसरी लहर की शुरुआत होते ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गांवों में संक्रमण की रोकथाम के प्रभावी कदम उठाने को कह दिया था। इसके बाद पहली लहर के दौरान गांवों में स्थापित क्वारंटाइन केंद्रों को फिर से सक्रिय किया गया। अन्य राज्यों अथवा शहरी क्षेत्रों से गांव लौटने वाले व्यक्तियों तथा परिवारों को यहां ठहराने, उनकी जांच तथा उपचार की व्यवस्था की गई। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मितानिनों तथा मैदानी अधिकारी-कर्मचारियों ने सर्दी-बुखार के मरीजों की पहचान की। जांच कराई, दवा वितरित की और उनके हालत की निगरानी की।