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180 दिनों में 174 आत्महत्या : छत्तीसगढ़ के धमतरी में औसतन हर दिन एक सुसाइड, नशा सबसे बड़ा कारण

धमतरी. छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से आत्महत्या के बढ़ते आंकड़े बेहद चिंताजनक है. साल 2026 के शुरुआती 6 महीने यानी 180 दिनों में केवल धमतरी में कुल 174 लोगों ने अपनी जिंदगी खत्म कर ली है. इन घटनाओं में पारिवारिक कलह, प्रेम प्रसंग जैसी वजहें भले ही रही हों लेकिन नशे एक बड़ा कॉमन फैक्टर बनकर सामने आया है. हर रोज सामने आ रही एक मौत
स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि साल 2026 के इन 180 दिनों में सिर्फ 6 दिनों को छोड़ दिया जाए तो हर रोज औसतन एक आत्महत्या का मामला दर्ज हुआ है. आत्मघाती कदम उठाने वालों में गरीब से लेकर संपन्न वर्ग और 19 साल के युवाओं से लेकर 65 साल तक के बुजुर्ग तक शामिल हैं. 95 फीसदी लोगों ने फांसी लगाकर अपनी जान दी, जबकि शेष 5 फीसदी ने जहर का सेवन किया था.
नशे की लत और ड्रिप्रेशन
नशे की लत और मानसिक तनाव सामने आए मामलों की गहराई से पड़ताल करने पर पता चलता है कि आत्महत्या के पीछे प्रेम प्रसंग, घरेलू कलह और एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर जैसे कारण शामिल हैं. हालांकि 90 फीसदी मामलों में लोग नशे की हालत में पाए गए.
सुसाइज केस के इन आकड़ों पर सीएसपी अभिषेक चतुर्वेदी ने कहा कि चिकित्सीय जानकारों का भी मानना है कि अत्यधिक नशा व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता को कमजोर कर देता है. इस कारण वह तनाव या गुस्से में आकर ऐसा खौफनाक कदम उठा लेता है. धमतरी जिले के 13 थानों और 2 पुलिस चौकियों के अंतर्गत शहरी और सेमी अर्बन इलाकों से ऐसे मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं. लगातार बढ़ते इन आंकड़ों से चिंतित डॉक्टर ने लोगों से अपील की है कि किसी भी प्रकार के तनाव मानसिक दबाव या समस्या की स्थिति में अकेले न रहें. तुरंत पुलिस या काउंसलर्स से संपर्क करें ताकि समय रहते जीवन बचाया जा सके.
कैसे लगेगी बढ़ते आत्महत्या मामलों पर रोक?
क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट प्रीति चांडक ने बताया कि सुसाइड टेनडेंसी बहुत ज्यादा बढ़ने लगी है. न केवल बड़ों में बल्कि बच्चों में भी यह समस्या देखने को मिल रही है. आत्महत्या करने का कोई एक कारण नहीं है. आर्थिक तंगी, मानसिक तनाव, रिश्तों में समस्याएं जैसी कई कारण है. दुर्भाग्य की बात यह है कि हमरे समाज की कुरूपता है कि मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर चर्चा नहीं की जाती है. अगर व्यक्ति शारीरिक रूप से अस्वस्थ हो तो डॉक्टर के पास जाते हैं, लेकिन मानसिक समस्या हो तो चुप्पी साध लेते हैं. और यही भारी पड़ जाती है. अगर आपके आसपास ऐसे लोग हैं, जो निराशावादी बाते करते हैं, लंबे वक्त से अकेले रह रहें हो, तो साथ बैठकर बिना जज किए आप उनकी बात सुनिए. जरूरत महसूस होने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के पास लेकर जाएं. इस तरीके से हम समाज में बढ़ते आत्महत्या के मामलों को रोक सकते हैं.