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जल जीवन मिशन का बुरा हाल, 107 में बनी सिर्फ 77 पानी टंकी, काम अधूरा छोड़कर भागे ठेकेदार…

10 hours ago
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राजनांदगांव। जिले में जल जीवन मिशन का बुरा हाल है। एक तरफ जहां गांव में सप्लाई के लिए अब तक टंकियां नहीं बन पाई हैं, वहीं करीब सोलह हजार से अधिक घरों में नल कलेक्शन नहीं पहुंच पाया है। ठेकेदारों ने काम अधूरा छोड़ दिया है, जिसके चलते मिशन का काम अटका हुआ है। तीन साल बीतने के बाद जिले में मिशन का कार्य शत-प्रतिशत नहीं हो पाया है। राजनांदगांव ब्लाक में करीब 107 टंकी बनाना था, जिसमें से अब तक सिर्फ 77 टंकी ही बनी हैं।

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2023 से शुरू हुआ प्रोजेक्ट अब तक जिले में पूरा नहीं हो पाया है। जिले में 1,56,789 घरों में नल कनेक्शन देने का टारगेट रखा गया है, जिसमें तीन साल बाद सिर्फ 1,40,491 घरों में ही कनेक्शन दिया गया है। 16298 घरों में अब तक कनेक्शन ही नहीं दिया गया है, जिसके कारण पिछले तीन सालों से ग्रामीण परेशान है। जिले में 662 गांव शामिल है, इसमें 180 गांव का काम अब तक पूरा नही हो पाया है। कहीं टंकी नहीं बनी तो कहीं पाइपलाइन बिछाने का कार्य अधूरा है।

ठेकेदारों ने किए हाथ खड़े

जिले में अमृत मिशन योजना के तहत ठेकेदारों को राशि का भुगतान नहीं किया जा रहा है। जिसके कारण वे काम अधूरा छोड़कर गायब हो गए है। जिसका खामियाजा आम लोगों के भुगतना पड़ रहा है। इस मामले में पीएचई विभाग के कार्यपालन अफसरों का कहना है कि अधूरे निर्माण को पूरा कराने का प्रयास किया जा रहा है। निर्माण एंजेसियों को निर्देश दिए जा रहे है।

कई ठेकेदारों का लाइसेंस भी हो चुका निरस्त

पीएचई विभाग द्वारा अब तक 70 से अधिक ठेकेदारों के लाइसेंस निलंबित भी कर दिए थे, लेकिन उनके द्वारा अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं किया है। बताया जा रहा है कि कार्यों के मूल्यांकन में व्यापक पैमाने में गड़बड़ी पाई गई है, जिसके चलते ठेकेदारों का भुगतान रोक दिया गया है। ऐसे में कई गांव में पाइप लाइन बिछ तो गई है, लेकिन टंकी से लाइन जोड़ा नहीं जा रहा है। इस तरह पीएचई विभाग और ठेकेदारों के लापरवाही का खामियाजा आम जनता को उठानी पड़ेगी।

ग्राम पंचायत को नहीं हुआ हैंडओव्हर

जल जीवन मिशन के तहत कार्य पूरा होने के बाद संचालन की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को दिया जाना है। लेकिन जिले में आठ सौ से अधिक ग्राम पंचायतों में एक भी ग्राम पंचायत को कार्य हैंड ओव्हर नहीं किया गया है। हालांकि, गांव पेयजल सप्लाई शुरू कर दिया गया है, लेकिन विभागीय तौर पर ग्राम पंचायतों को हैंडओव्हर नही किया गया है।

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