ताजा खबरें
  • Chhattisgarh
  • ‘सिकासार’ के अतिरिक्त जल से महासमुंद जिले का सूखा होगा दूर, कोडार डेम से जोड़ने 3040 करोड़ की नहर लिंक परियोजना को मिली मंजूरी…

‘सिकासार’ के अतिरिक्त जल से महासमुंद जिले का सूखा होगा दूर, कोडार डेम से जोड़ने 3040 करोड़ की नहर लिंक परियोजना को मिली मंजूरी…

2 months ago
73

गारियाबंद। सिकासार जलाशय के अतिरिक्त जल से आने वाले दिनों में महासमुंद जिले का सूखा दूर होगा। सीकासार-कोडार जलाशय नहर लिंक परियोजना के लिए 3040 करोड़ की मंजूरी मिली है। डेम से डेम को जोड़ने वाली इस पहली परियोजना से अतिरिक्त 25 हजार हेक्टेयर रकबे को सिंचाई सुविधा मिलेगी।

भाजपा सरकार ने सीकासार कोडार जलाशय नहर लिंक परियोजना के लिए 3040 करोड़ की मंजूरी दे दिया है। परियोजना को वर्ष 2029 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। मंजूरी के बाद सिंचाई विभाग ने टेंडर की प्रकिया शुरू कर दी है। कई मायने में यह परियोजना भाजपा सरकार की सबसे अलग-थलग और अहम योजना मानी जा रही है।

विभाग के ईई एसके बर्मन ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि उच्च अधिकारियों के मार्गदर्शन में टेंडर कॉल की तैयारी की जा रही है।कार्य किसी अनुभवी और पारंगत ठेका कम्पनी को ही दी जाए इसकी तैयारी विभाग कर रही है।

79,650 परिवार होंगे लाभान्वित

सिकासार जलाशय के प्रमुख नहरों से अब तक गरियाबंद और मगररोड क्षेत्र के 101 गांव में रवि और खरीफ़ मिलकर 58 हजार हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा दी जाती थी। लेकिन नई परियोजना से अतिरिक्त 178 गांव में सिंचाई, पेयजल और औद्योगिक क्षेत्र के लिए पानी की सप्लाई होगी। 41780 एसटी और 6145 एससी परिवार समेत कुल 79650 परिवार इससे लाभान्वित होंगे। परियोजना में बागबाहरा और झलप क्षेत्र के कई असिंचित रकबा तक न केवल सिंचाई सुविधा मिलेगी, बल्कि वाटर लेबल रिचार्ज कर पेयजल संकट को भी दूर किया जाना योजना का मकसद होगा।

भूमिगत स्टील पाइप से जुड़ेंगे जलाशय

यह पहली परियोजना है, जिसमें इंजीनियरिंग के नए तकनीकी मापदंडों का भरपूर इस्तेमाल किया जाएगा। 88 किमी लंबे भूमिगत स्टील पाइप से सीकासार बैराज का अनुपयुक्त जल सीधे कोडार पहुंचेगा, सोखने और वाष्पीकरण का प्रभाव से 25 फीसदी तक नष्ट होने वाला जल सुरक्षित हो जाएगा।विभाग का दावा है कि इस पद्धति से 30 से 35 मिलियन घन मीटर पानी की बचत होगी जिससे अतिरिक्त सिंचाई या जल संचय किया जाएगा। यही वजह है कोडार के अलावा प्रोजेक्ट में केशवा जलाशय के सूखे को दूर किया जाएगा।

स्काडा तकनीकी से गांवों में पहुंचेगा पानी

डेम टू डेम जोड़ने की पहली परियोजना में सेंसर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है।जिन गांव से पाइप लाइन गुजरेगी वहां प्रत्येक गांव के लिए एक आउट लेट भी होगा।जरूरत के मुताबिक इस आउटलेट में पानी ओटोमेटिक होगा।इसे इंजीनियरों ने स्काडा तकनीकी से कंट्रोल करेंगे।कमांड रूम में सेंसर टेक्नोलॉजी इसकी मॉनिटरिंग करेगा।

नवाचार की जिद से मिली सफलता

संभाग में कार्यपालन अभियंता एसके बर्मन महासमुंद में सेवा देने के बाद गरियाबंद में पिछले 4 साल से सेवा से रहे हैं। इन्होंने बांध को बांध से जोड़ने पर विचार किया, और 2022 में इसे बड़े अफसरों के सामने प्रस्तुत किया. सिंचाई विभाग के सचिव राजेश टोप्पो को भी योजना रास आ गई। तकनीकी में नवाचार था, ऐसे में इसकी सर्वे की मंजूरी 2023 में मिल गई। बर्मन ने बताया कि वर्तमान में 58 हजार हेक्टेयर को पर्याय सिंचाई सुविधा देने के अलावा सिकासार का प्रवाह व्यर्थ जा रहा था।

द्वितीय चरण की भी शुरू हो गई है तैयारी

नदी को नदी से, नहर को नहर से जोड़ने की परियोजना चल रहे थे, इसी कॉन्सेप्ट पर हमने बांध को बांध से जोड़ने की योजना का प्रारूप सरकार के समक्ष रखी, ड्रोन और आधुनिक लिडार सर्वे के अलावा, जिसकी कई चरणों के परीक्षण और दूरदर्शिता को देखते हुए सरकार ने मंजूरी दे दी है. उन्होंने कहा कि द्वितीय चरण में सिकासार को अमानाला और सोन नदी से जोड़ने की तैयारी की जा रही है।

Social Share

Advertisement