रायपुर, 13 अगस्त 2022/ चुनाव में रेवड़ी बांटने को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बयान के बाद छत्तीसगढ़ में भी चर्चा तेज हो गई है। मुख्यमंत्री निवास में शुक्रवार को मीडिया से चर्चा में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि देश और प्रदेश के खजाने पर सबका अधिकार है।

लोगों को भोजन नहीं मिल पा रहा है। मकान नहीं बन पा रहे हैं। ऐसे में रेवड़ी बांटना किसे कहा जाएगा। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि न्यूनतम आवश्यकता को समझना होगा। उन्होंने पूछा कि बीमार उद्योग को मदद पहुंचाना, गरीबों को अनाज देना क्या रेवड़ी है।

देश को तय करना होगा रेवड़ी क्या है। यह अच्छा है कि इस पर चर्चा तेज हो रही है। दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी ने किसी राजनीतिक दल या सरकार का नाम लिए बिना रेवड़ी कल्चर से दूर रहने की सीख दी थी। इसके बाद देशभर में राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया आ रही है।

कांग्रेस के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो रेवड़ी की कोई ठोस परिभाषा सामने नहीं आई है। राज्य में राजनीतिक दल स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर चुनाव में वादे करते हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अपने जनघोषणा पत्र में किसानों की कर्जमाफी, मुफ्त बिजली और धान का बोनस देने का वादा किया था। इन वादों के कारण जनता ने कांग्रेस को हाथों हाथ लिया और अब तक का सबसे बड़ा बहुमत दिया।