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रायपुर में गुजरात और महाराष्ट्र से आ रहा सिंगल यूज प्लास्टिक, ट्रांसपोर्ट कंपनियों की नहीं हो रही जांच

4 years ago
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रायपुर में गुजरात और महाराष्ट्र से आ रहा सिंगल यूज प्लास्टिक, ट्रांसपोर्ट कंपनियों की नहीं हो रही जांच

रायपुर, 29 जुलाई 2022/  केंद्र सरकार के निर्देश पर एक जुलाई से राज्य सरकार ने सिंगल यूज प्लास्टिक(एसयूपी) पर भले ही प्रतिबंध लगा दिया हो, लेकिन रायपुर समेत पूरे सूबे में ट्रांसपोर्ट कंपनियों के जरिए महाराष्ट्र और गुजरात से एसयूपी यहां बड़े पैमाने पर आपूर्ति कर खपाया जा रहा है। कारोबारी सूत्रों के मुताबिक राजधानी में ज्यादातर एसयूपी की आवक गुजरात और महाराष्ट्र से हैं।

यह ट्रांसपोर्ट के जरिए आ रहा है। ट्रांसपोर्ट और गैरेज की जांच-पड़ताल करने नगर निगम और जिला प्रशासन का कोई ध्यान ही नहीं है।अब तक एक भी ट्रांसपोर्ट की जांच न करना सवाल खड़े कर रहा है।क्योंकि यही से एसयूपी बड़े कारोबारियों के गोदामों तक पहुंच रहा है।

राज्यभर भले ही एसयूपी पर प्रतिबंध लगा हो लेकिन चोरी-छिपे स्थानीय स्तर पालीथीन का उत्पादन किया जा रहा है।हालांकि निगम के अधिकारी यह दावा कर रहे है कि एक जुलाई के पहले ही पालीथीन निर्माण करने वाली फैक्टरियां बंद हो चुकी है।लेकिन जानकार सूत्रों का कहना है कि कुछ बड़े व्यापारी अभी भी पालीथिन का उत्पादन कर बाजार में खपा रहे हैं।

यहां पहुंच रहा एसयूपी

शहर के टाटीबंध, भनपुरी, ट्रांसपोर्टनगर, गंजपारा आदि इलाके में कई छोटी-बड़ी ट्रांसपोर्ट कंपनियां है। इन कंपनियों की गाड़ियां रोज महाराष्ट्र और गुजरात से धड़ल्ले से बड़ी मात्रा में एसयूपी ला रही है। ट्रांसपोर्ट के गोदामों में डंप होने के बाद इसे व्यापारी अपने ठिकाने पर जमाकर छोटे दुकानदारों को बेच रहे हैं।

इन पर भी सख्ती जरूरी

एसयूपी उत्पाद पर प्रतिबंध को लेकर बाजार के जानकारों का कहना है कि इसका सूचीबद्व कंपनियों पर फिलहाल ज्यादा असर नहीं होगा। जब यह बैन, साबुन, शैंपू, तेल जैसे उत्पाद के सचेत पाउच पर लगाया जाएगा तो एफएमसीजी कंपनियों पर असर दिखाई देगा। जानकारों का कहना है कि जब पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले सिंगल यूज प्लास्टिक को बैन किया जाएगा, तब कंज्यूमर कंपनीज पर इसका सीधा असर होगा. जो कंपनियां बिस्किट, नूडल्स, चाय, सर्फ, साबुन जैसे प्रोडक्ट्स बेचती हैं, उन पर इसका असर होगा।

हर माह तीन सौ टन खपत

व्यापारियों के अनुसार कुछ माह पहले तो अकेले राजधानी रायपुर में हर महीने ढाई सौ से लेकर तीन सौ टन तक का एसयूपी का व्यापार होता था। जुलाई में प्रतिबंध लगने के बाद से प्रशासनिक जांच, सख्ती और कार्रवाई के बाद इसकी खपत काफी कम हुई है। हालांकि कई व्यापारी अभी भी दूसरे राज्यों से पालीथिन मंगवाकर यहां खपा रहे हैं।

जैविक थैला ही विकल्प

हाल ही में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पर्यावरण मंत्रालय को एक प्रस्ताव भेजा था, जिसमें कहा गया है कि आम खरीदारी के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले प्लास्टिक बैगों के बजाय अब बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक बैग (जैविक थैला) का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। बायोडिग्रेडिबल प्लास्टिक आम प्लास्टिक थैलियों से विपरीत आसानी से नष्ट किए जा सकते हैं।

पर्यावरण को हो रहा नुकसान

पिछले कुछ सालों से एसयूपी के इस्तेमाल को लेकर बहस बढ़ी है, मगर इस बार केंद्र के साथ राज्य सरकार एक्शन के मूड में है। जानकारों का कहना है कि प्रतिबंधित प्लास्टिक को नष्ट नहीं किया जा सकता। यह मिट्टी और पानी दोनों के लिए हानिकारक होता है, जो सालों तक खराब न होने की वजह से मिट्टी और पानी पर अपना बुरा असर छोड़ रहा है। यही वजह है कि अब इन प्लास्टिक उत्पादों को पूरी तरह से प्रतिबंध करने का कड़ा फैसला लिया गया है।

 

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