- Home
- breaking
- Chhattisgarh
- पर्यटन को बढ़ावा देने और जल संरक्षण की दृष्टि से नौ जलाशयों का होगा कायाकल्प
पर्यटन को बढ़ावा देने और जल संरक्षण की दृष्टि से नौ जलाशयों का होगा कायाकल्प


रायपुर 07 अप्रैल 2022/ छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा राज्य के नौ जलाशयों का कायाकल्प करने की योजना की तैयार की गई है। इन नौ जगहों में से दो जगहों पर काम शुरू भी कर दिया गया है। इनमें धमतरी स्थित गंगरेल बांध और दूसरा कोरबा जिले में स्थित सतरेंगा जलाशय है। बताया जाता है कि इन जगहों पर पर्यटकों की संख्या अत्याधिक होने के कारण पहले चरण में नए सिरे से इन जलाशयों को विकसित किया जा रहा है।
वाटर स्पोर्ट्स टूरिज्म के रूप में पहचान दिलाने की योजना
यहां अब अत्याधुनिक बोटिंग की सुविधा, गार्डन समेत रिसार्ट आदि पर फोकस किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि पर्यटन मंडल द्वारा जिन जलाशयों को विकसित किया जाना है उनमें धमतरी के मुरुमसिल्ली, गंगरेल, कोरबा के सतरेंगा, हसदेव बांगों डैम से लेकर बिलासपुर के संजय गांधी (खुंटाघाट), कवर्धा के सरोदा बांध, रायपुर के समोदा बांध, महासमुंद के कोडार डैम, मरवाही के मलानिया और कांकेर जिले के दुधावा जलाशय शामिल हैं।
जहां नए सिरे से पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए जलाशयों को विकसित करने का प्लान है। हालांकि बजट के अभाव के कारण इनमें से अभी तक दो जगहों पर ही काम शुरू कर पाया है,लेकिन छत्तीसगढ़ शासन वाटर स्पोर्ट्स टूरिज्म के रूप में इन स्थानों को पहचान दिलाने की योजना पर काम कर रहा है।
2018 से तैयार योजना के लिए अब तक नहीं मिल पाया बजट
पर्यटन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक इन सभी जलाशयों में पर्यटन और जल संरक्षण की दृष्टि से बहुत संभावनाएं हैं, इसी दृष्टि से यहां पर विकास किया जा रहा है। फिलहाल जितना बजट मिल पा रहा है उसके मुताबिक कार्य किया जा रहा है। लेकिन बजट के अभाव में अन्य जलाशयों का काम पिछड़ भी रहा है। जबकि विकसित करने की योजना 2018 से तैयार कर ली है। फिर भी लगभग चार सालों में अब तक सिर्फ दो जगहों को ही विकसित किया जा सका है। अधिकारियों का कहना है कि विकसित करने का कार्य निरंतर चल रहा है। लेकिन जिन जगहों पर सुविधाएं कम हैं वहां पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा।
अन्य प्रांतों से भी पहुंचते है सैलानी
प्रदेश के इन जलाशयों में अन्य प्रांतों से सैलानी काफी तादाद में पहुंचते हैं। कई जगहों पर रिसार्ट वगैरह की सुविधा नहीं होने के कारण ठहरने के लिए सैलानियों को कई किलोमीटर बाहर शहर वापस आना पड़ता है जहां से वापस पर्यटक नहीं जाते, लेकिन रिसार्ट बन जाने के बाद पर्यटकों का ठहराव होगा। जिससे पर्यटन विभाग को फायदा होगा।