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CG मुख्यमंत्री ने किया ऐलान : नक्सल हिंसा से तंग आकर छत्तीसगढ़ छोड़कर गए आदिवासियों को फिर से बसाएगी सरकार

4 years ago
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Chhattisgarh government said tribals affected by Salwa Judum will be  resettled | नक्सल हिंसा से तंग आकर छत्तीसगढ़ छोड़कर गए आदिवासियों को फिर से बसाएगी  सरकार, मुख्यमंत्री ने ...

 

 

रायपुर, 04 अप्रैल 2022/   राज्य सरकार ने नक्सल हिंसा की वजह से बेघर हुए आदिवासियों के लिए बड़ा फैसला किया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ऐलान किया है कि जिन आदिवासियों को अपने घर-गांव छोड़ने पड़े, वो लौटना चाहते हैं तो सरकार उनकी सुरक्षा और रहने का बंदोबस्त करेगी।
दैनिक भास्कर ने खबर प्रकाशित की थी कि आंध्र और तेलंगाना से कई आदिवासी ग्रामीण छत्तीसगढ़ सरकार से मदद मांग रहे हैं। ये वही आदिवासी थे जो सालों पहले नक्सलियों के आतंक से तंग आकर छत्तीसगढ़ छोड़ पड़ोसी राज्यों में चले गए थे। मामला उजागर हुआ तो अब इनकी तरफ छत्तीसगढ़ सरकार ने मदद का हाथ बढ़ाया है।

सोमवार को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मिलने ऐसे ही आदिवासी ग्रामीणों का एक प्रतिनिधी मंडल समाज सेवी शुभ्रांशु चौधरी के साथ मिलने पहुंचा था। मुख्यमंत्री ने इन आदिवासियों की समस्या को सुनकर कहा है कि सलवा जुडूम के दौरान छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा से विस्थापित कर तेलंगाना और आंध्रप्रदेश गए छत्तीसगढ़ के लोग यदि वापस आना चाहते हैं, तो राज्य सरकार उनका दिल से स्वागत करने को तैयार है। कार्ययोजना बनाकर उनके पुनर्वास के लिए अनुकूल वातावरण बनाया जाएगा।

अफसरों को दी गई जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री से मिलने आए इस प्रातिनिधि मंडल में शामिल लोग सलवा जुडूम के दौरान छत्तीसगढ़ के सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा जिले से विस्थापित हो कर तेलंगाना चले गए थे। मुख्यमंत्री बघेल से मुलाकात के दौरान प्रतिनिधि मंडल ने उनसे किसी उपयुक्त स्थान में बसने और कृषि के लिए जमीन उपलब्ध कराने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने उनकी मांग पर कहा कि छत्तीसगढ़ वापस आने के इच्छुक लोगों को जमीन देने के साथ उन्हें राशन दुकान, स्कूल, रोजगार सहित मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएंगी। उन्होंने इसके लिए गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू और पुलिस महानिदेशक अशोक जुनेजा को भी उचित कदम उठाने को कहा है।

ऐसे बसाए जाएंगे ग्रामीण

आदिवासियों की इस पूरी मुहिम को करीब से समझने वाले समाजसेवी शुभ्रांशु ने बताया कि आदिवासियों से मिलते वक्त मुख्यमंत्री ने उनकी मांगों को स्वीकार करते हुए काफी सकारात्मक ढंग से इस विषय को हैंडल किया। उन्होंने कहा कि जो ग्रामीण आएंगे उनके लिए गांव बसाए जाएंगे। इस बात का ध्यान भी रखा जाएगा कि उन्हें पूरी सुरक्षा मिले। बस्तर जिला प्रशासन के अफसरों से भी वो जल्द इस पर बात करेंगे। कुछ ग्रामीणों ने बताया कि वो अपने पुराने गांव नहीं जाना चाहते क्योंकि वहां नक्सली अब भी उनसे दुश्मनी पाले बैठे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दूसरी जगहों पर ऐसे लोगों को शिफ्ट किया जाएगा। रोजगार की मांग पर मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीणों को यहां लाए जाने के बाद पढ़े लिखे युवकों को गांव के स्कूलों में शिक्षादूत, खेती करने वालों को कृषि, दूसरे कामगारों बस्तर में मौजूद रोजगार के अवसरों और ट्रेनिंग से जोड़ा जाएगा ताकि वो अपने पैरों पर खड़े हो सकें। शुभ्रांशु ने बताया कि कुछ ऐसे आदिवासी भी हैं जो छत्तीसगढ़ लौटना ही नहीं चाहते वो आंध्र और तेलंगाना में रहना चाहते हैं, तो ऐसे में हम केंद्र सरकार से इस पर बात करने दिल्ली भी जा रहे हैं।

इस वजह से छत्तीसगढ़ लौटना चाहते हैं ग्रामीण

आदिवासियों को छत्तीसगढ़ में साल 2005 में बढ़ती नक्सल घटनाओं पर रोक लगाने के मकसद से हथियार थमाए गए। इस अभियान को नाम दिया गया, सलवा जुडूम इसका अर्थ होता है ‘शांति का कारवां’। इसमें पुलिस और अर्धसैनिक बल के अलावा ग्रामीण भी नक्सलियों को मार रहे थे। इससे गुस्साए नक्सलियों ने ग्रामीणों को निशाना बनाया। जुडूम अभियान की हिंसा की वजह से परेशान होकर 644 गांव से 55 हजार आदिवासी बस्तर के कई जिलों को छोड़कर आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में जा बसे। इन दिनों कश्मीरी हिंदुओं की बड़ी चर्चा है जो ऐसे ही हिंसा का शिकार हुए और उन्हें अपनी जमीन छोड़नी पड़ी।

इसी तरह तेलंगाना गए ग्रामीण माड़ी वीरेश ने बताया कि अब तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की सरकारें कोविड काल के दौरान अचानक हमारे खिलाफ हो गईं। जिन जंगलों को काटकर छत्तीसगढ़ के आदिवासी वहां खेती किसानी कर रहे थे, उन जमीनों पर अब तेलंगाना और आंध्र प्रदेश का वन विभाग पौधरोपण कर रहा है। झोपड़ियों पर बुलडोजर चलाए जा रहे हैं, खेती छिन जाने की वजह से ग्रामीण वहां कुली मजदूरी का काम करने के लिए मजबूर हैं। बच्चों को शिक्षा का अधिकार तक नहीं मिल पा रहा, जब वहां मदद मांगते हैं तो उन राज्यों की सरकार कह देती है कि जाकर अपनी छत्तीसगढ़ सरकार से मदद मांगो।

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