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कोरोना संभला तो प्रदेश में टीबी का टेंशन, छत्तीसगढ़ इस बीमारी की रोकथाम में पिछड़ गया; स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा- कोविड टेस्ट में लगी ट्रू नॉट मशीनों से फिर शुरू करेंगे जांच

4 years ago
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सिंहदेव ने बताया, कोरोना की वजह से छत्तीसगढ़ में टीबी रोकथाम की स्थिति निर्धारित लक्ष्य की तुलना में अच्छी नहीं है। - Dainik Bhaskar

 

 

 

 

 

 

 

02 सितम्बर 2021/    कोरोना महामारी के भीषण प्रहार से प्रदेश में टीबी (Tuberculosis) की जांच और इलाज के तंत्र को बिगाड़ दिया है। स्वास्थ्य विभाग अब कोरोना जांच में लगी ट्रू नॉट मशीनों को फिर से टीबी की जांच में लगाएगा। हर जिले में कम से 2 मशीनों का उपयोग केवल टीबी की जांच के लिए होगा।

यह जानकारी स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने दी है। सिंहदेव आज राजधानी के चिप्स मुख्यालय स्थित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग हॉल में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया के साथ वर्चुअल बैठक में शामिल थे। वहां उन्होंने बताया, छत्तीसगढ़ में टीबी रोकथाम की स्थिति निर्धारित लक्ष्य की तुलना में अच्छी नहीं है। कोरोना संक्रमण की वजह से हमारी गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। वर्तमान समय में छत्तीसगढ़ में पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर मिलाकर टीबी के 18 हजार 233 एक्टिव केस हैं। निजी क्षेत्र में इनकी संख्या 3 हजार 919 है। अभी इन्हें अपडेट करने की जरूरत पड़ सकती है। स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा, हमारे पास 160 ट्रूनॉट मशीन है। इसे बड़े पैमाने पर हमने कोरोना वायरस की जांच में लगाया है। अब कम से कम हर जिले में औसतन दो मशीनें टीबी की जांच के लिए उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। सिंहदेव ने बताया, हमने प्लान किया है कि छत्तीसगढ़ में दो टीबी सर्वाइवर को चिन्हित कर उनको एंबेसडर या प्रेरक बनाया जाएगा, ताकि बीमारी और इलाज के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाई जा सके।

स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रजेंटेशन में पिछड़ा दिखा प्रदेश

टीबी की स्थिति पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक प्रजेंटेशन सामने रखा। इसमें बताया गया, जनवरी 2021 से जुलाई 2021 तक टीबी पर नियंत्रण पाने का जो लक्ष्य तय हुआ था उसमें छत्तीसगढ़ केवल 50% हासिल कर पाया। वहीं राष्ट्रीय औसत 67% तक का है। टीबी के उपचार के लिए 90% की लक्ष्य सीमा निर्धारित की गई थी, जिसमें राष्ट्रीय औसत 81% प्राप्त की है और छत्तीसगढ़ 83% पर रहा है। पोषण योजना के क्रियान्वयन में राष्ट्रीय औसत 57% और छत्तीसगढ़ का प्रदर्शन 49% पर रहा है।

शेल्टर होम्स में मिले 12% केस

बैठक में बताया गया, टीबी की स्क्रीनिंग के दौरान प्रदेश के शेल्टर होम्स में सर्वाधिक 12% केस आए हैं। प्रेजेर इनमेट्स में 5% और माइंस में 3% मामले हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कुपोषण, भीड़ वाली जगह और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता को टीबी के फैलते जाने की मुख्य वजह माना है।

कोरोना संक्रमण की शुरुआत में छत्तीसगढ़ में RT-PCR जांच के लिए लैब नहीं थे, उस समय टीबी की जांच में इस्तेमाल हो रही ट्रू नॉट मशीनों ने सटीक जांच का राह बनाई।

 

कोरोना संक्रमण की शुरुआत में छत्तीसगढ़ में RT-PCR जांच के लिए लैब नहीं थे, उस समय टीबी की जांच में इस्तेमाल हो रही ट्रू नॉट मशीनों ने सटीक जांच का राह बनाई।

 

क्या है यह ट्रनॉट मशीन

इस मशीन के इस्तेमाल से टीबी के बैक्टीरिया या अन्य रोगों के रोगाणु को खोजा जाता है। यह मशीन डीएनए में लक्षण पहचानने की तकनीक का इस्तेमाल करती है और PCR के साथ ही रिवर्स ट्रांस्क्रिप्शन PCR करती है। कोरोना महामारी से पहले तक इस मशीन का इस्तेमाल ड्रग रेसिस्टेंट टीबी की जांच के लिए होता रहा है। अप्रैल 2020 में ICMR ने इस मशीन से कोविड-19 जांच की मंज़ूरी दी थी।

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