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छत्तीसगढ़ कोल स्कैम: मास्टरमाइंड सूर्यकांत तिवारी के रिश्तेदार नवनीत तिवारी को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत

3 months ago
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रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला घोटाला (Coal Levy Scam) मामले में मास्टरमाइंड सूर्यकांत तिवारी के रिश्तेदार नवनीत तिवारी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। मुख्य न्यायाधीश सुर्यकांत (CJI) की अगुवाई वाली पीठ ने उन्हें जमानत प्रदान कर दी है। नवनीत तिवारी पिछले चार महीने से रायपुर सेंट्रल जेल में बंद थे।

सूर्यकांत तिवारी के रिश्तेदार, कोल लेवी सिंडिकेट में सक्रिय भूमिका

नवनीत तिवारी, मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल में बंद चर्चित कारोबारी सूर्यकांत तिवारी के रिश्ते के भाई हैं। ईडी और ईओडब्ल्यू की जांच में नवनीत को अवैध कोल लेवी सिंडिकेट का सक्रिय सदस्य बताया गया है। आरोप है कि वह रायगढ़ जिले में कोल व्यवसायियों और ट्रांसपोर्टरों से करोड़ों रुपये की अवैध वसूली करता था और यह रकम नियमित रूप से रायपुर पहुंचाई जाती थी।

जांच एजेंसियों ने यह भी दावा किया है कि नवनीत ने सूर्यकांत तिवारी की बेनामी संपत्तियों के प्रबंधन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

2022 से फरार, जुलाई 2025 में गिरफ्तारी

ईडी ने नवनीत को 2022 में इस हाई-प्रोफाइल केस में आरोपी बनाया था। इसके बाद वह लगातार फरार रहा। जुलाई 2025 में EOW ने उसे गिरफ्तार किया। मामले में गिरफ्तारी का सिलसिला तेज होने पर वह अन्य आरोपियों के साथ भूमिगत हो गया था। ईडी ने उसकी तलाश में कई छापेमारियां कीं और बाद में गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता शशांक मिश्रा ने तर्क रखते हुए बताया कि नवनीत की गिरफ्तारी परिस्थितिजन्य तथ्यों पर आधारित है, और वह जांच में सहयोग के लिए तैयार है। इन दलीलों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।

क्या है 570 करोड़ का छत्तीसगढ़ कोयला घोटाला?

यह घोटाला छत्तीसगढ़ में कोयले के परिवहन, परमिट और खनन से जुड़े अवैध वसूली नेटवर्क से संबंधित है। ईडी का दावा है कि राज्य में लगभग 570 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध वसूली की गई।

घोटाला कैसे चलता था?

  • कोयला परिवहन के लिए मिलने वाले ऑनलाइन परमिट को ऑफलाइन किया गया।
  • यह आदेश 15 जुलाई 2020 को खनिज विभाग के तत्कालीन संचालक आईएएस समीर विश्नोई ने जारी किया था।
  • इसके बाद रायगढ़, कोरबा और आसपास के क्षेत्रों में कोल ट्रांसपोर्टरों से 25 रुपये प्रति टन की दर से वसूली की जाने लगी।
  • व्यापारियों द्वारा यह राशि सूर्यकांत तिवारी के कर्मचारियों को दी जाती थी।
  • इसके बदले में खनिज विभाग द्वारा पीट पास और ट्रांसपोर्ट पास जारी किए जाते थे।

जांच में आरोप लगाया गया कि इस वसूली से 570 करोड़ रुपये से अधिक की ब्लैक मनी इकट्ठा की गई, जिसका उपयोग संपत्तियों और राजनीतिक फंडिंग में किया गया।

मास्टरमाइंड – सूर्यकांत तिवारी

पूरे नेटवर्क का संचालन कथित तौर पर कोल कारोबारी सूर्यकांत तिवारी करता था।

  • ईडी ने उसे इस मामले का किंगपिन बताया है।
  • सबसे पहले आईएएस समीर विश्नोई की गिरफ्तारी हुई, उसके बाद सूर्यकांत तिवारी को भी गिरफ्तार किया गया।
  • नवनीत तिवारी इसी नेटवर्क का मुख्य फील्ड ऑपरेटर बताया गया है।

जमानत के बाद क्या?

जमानत मिलने के बाद भी नवनीत तिवारी को कोर्ट द्वारा तय की गई कई शर्तों का पालन करना होगा। मामला अभी ट्रायल चरण में है और ईडी–EOW दोनों एजेंसियाँ आरोपों की आगे जाँच कर रही हैं।

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