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नवंबर माह से क्यों बढ़ जाती है खांसी-जुकाम की परेशानी? मौसम बदलने पर इन बातों का रखें ध्यान, जानें बचाव के तरीके

7 hours ago
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Lifestyle Desk : नवंबर का महीना मौसम में बदलाव का संकेत देता है। इस दौरान सुबह और शाम हल्की ठंड महसूस होने लगती है, जबकि दोपहर में धूप और गर्मी बनी रहती है। दिन और रात के तापमान में होने वाला यह अंतर कई लोगों के लिए परेशानी का कारण बन जाता है। यही वजह है कि इस मौसम में खांसी, जुकाम, गले में खराश, छींक और नाक बहने जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। बच्चों और बुजुर्गों में इन परेशानियों का खतरा अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है।

कई बार लोग मौसम में बदलाव को ही सर्दी-जुकाम की वजह मान लेते हैं, लेकिन इसके पीछे वायरस, एलर्जी और वायु प्रदूषण जैसे कई कारण भी जिम्मेदार होते हैं। खासकर जिन लोगों को पहले से अस्थमा या सांस संबंधी परेशानी है, उन्हें इस मौसम में ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है। आइए जानते हैं कि खांसी-जुकाम की समस्या क्यों बढ़ती है और इससे बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

तापमान में उतार-चढ़ाव
नवंबर माह से सुबह और शाम का तापमान कम हो जाता है, जबकि दिन में गर्मी बनी रहती है। ऐसे में शरीर को बदलते तापमान के अनुसार खुद को ढालना पड़ता है। ठंडे और गर्म वातावरण के बीच बार-बार आने-जाने से कुछ लोगों में नाक और गले की संवेदनशीलता बढ़ सकती है। हालांकि, केवल ठंड लगने से वायरल संक्रमण नहीं होता, इसके लिए वायरस का संपर्क भी जरूरी है।

वायरल संक्रमण का बढ़ना
मौसम बदलने के दौरान सर्दी-जुकाम फैलाने वाले वायरस सक्रिय रहते हैं। इनमें राइनोवायरस और इन्फ्लुएंजा वायरस प्रमुख हैं। जब संक्रमित व्यक्ति खांसता, छींकता या बातचीत करता है, तो उसके आसपास वायरस फैल सकते हैं। इसके अलावा संक्रमित सतह को छूने के बाद बिना हाथ धोए आंख, नाक या मुंह छूने से भी संक्रमण हो सकता है।

वायु प्रदूषण और धूल के कण
उस समय में कई शहरों में प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगता है। हवा में मौजूद धूल, धुआं और सूक्ष्म कण सांस के जरिए शरीर में पहुंचकर नाक और गले में जलन पैदा कर सकते हैं। इससे लगातार खांसी, छींक और गले में खराश की समस्या हो सकती है। अस्थमा के मरीजों के लिए यह स्थिति ज्यादा परेशानी पैदा कर सकती है।

एलर्जी की समस्या
मौसम बदलने के साथ हवा में धूल, परागकण और फफूंद के कणों का संपर्क कुछ लोगों में एलर्जी को बढ़ा सकता है। ऐसे लोगों को बार-बार छींक आना, नाक में खुजली, आंखों से पानी आना और गले में खराश जैसी समस्याएं हो सकती हैं। एलर्जी और वायरल सर्दी-जुकाम के लक्षण कई बार एक जैसे लगते हैं, इसलिए लंबे समय तक परेशानी रहने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

सुबह-शाम ठंड में लापरवाही
कई लोग दिन में गर्मी देखकर सुबह और शाम के समय भी हल्के कपड़ों में बाहर निकल जाते हैं। इससे उन्हें ठंड और असहजता महसूस हो सकती है। इसलिए सुबह और शाम बाहर निकलते समय मौसम के अनुसार कपड़े पहनें। खासकर बच्चों और बुजुर्गों को ठंडी हवा से बचाने का ध्यान रखें।

खांसी-जुकाम से बचने के लिए अपनाएं ये उपाय
हाथों की सफाई रखें-बाहर से घर आने के बाद और खाना खाने से पहले साबुन से हाथ जरूर धोएं। इससे संक्रमण फैलने का खतरा कम होता है।

पर्याप्त पानी पिएं-शरीर में पानी की कमी न होने दें। पर्याप्त तरल पदार्थ लेने से गले में नमी बनी रहती है और शरीर सामान्य रूप से काम करता है।

मौसम के अनुसार कपड़े पहनें-सुबह और शाम ठंड बढ़ने पर गर्म कपड़े पहनें। बच्चों को भी मौसम के अनुसार कपड़े पहनाकर बाहर भेजें।

प्रदूषण से बचाव करें-हवा की गुणवत्ता खराब होने पर अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें। जरूरत पड़ने पर अच्छी गुणवत्ता वाला मास्क इस्तेमाल करें।

संतुलित भोजन करें-खाने में मौसमी फल, हरी सब्जियां, दालें और प्रोटीन से भरपूर चीजें शामिल करें। इससे शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं।

पर्याप्त नींद लें-रोजाना 7 से 9 घंटे की नींद लेने की कोशिश करें। अच्छी नींद शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को सामान्य बनाए रखने में मदद करती है।

संक्रमित लोगों से सावधानी रखें-अगर आसपास किसी को खांसी-जुकाम है, तो उसके बहुत करीब जाने से बचें। खांसते और छींकते समय मुंह को ढकना चाहिए।

टीकाकरण पर ध्यान दें-डॉक्टर की सलाह के अनुसार फ्लू का टीका लगवाने पर विचार करें। खासकर बुजुर्गों, छोटे बच्चों और पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए यह महत्वपूर्ण हो सकता है।

किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है?
अस्थमा, सीओपीडी और दूसरी पुरानी सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को मौसम बदलने के दौरान विशेष सावधानी रखनी चाहिए। इसके अलावा छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में संक्रमण का खतरा अधिक हो सकता है। ऐसे लोगों को अपनी नियमित दवाएं डॉक्टर की सलाह के अनुसार लेते रहना चाहिए।

कब डॉक्टर के पास जाना जरूरी है?
सामान्य सर्दी-जुकाम कुछ दिनों में ठीक हो सकता है, लेकिन हर बार खांसी को मामूली समझना सही नहीं है। अगर तेज बुखार लगातार बना रहे, सांस लेने में परेशानी हो, सीने में दर्द हो, घरघराहट सुनाई दे या खांसी लगातार बढ़ती जाए, तो डॉक्टर से संपर्क करें। छोटे बच्चों और बुजुर्गों में लक्षण गंभीर होने पर इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए।

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