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किसानों का कन्फ्यूजन दूर कीजिये सरकार… धान के अंतर की राशि भुगतान को लेकर संशय बरकरार

2 hours ago
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रायपुर। धान खरीदी की शुरुआत 15 नवंबर से होने जा रही है, लेकिन इस बार धान बेचने पर समर्थन मूल्य के बाद अंतर की राशि किस हिसाब से मिलेगी, इसको लेकर किसानों में जबरदस्त कन्फ्यूजन है. 27 अक्टूबर को विष्णुदेव साय कैबिनेट की बैठक के बाद 19 बिंदुओं में प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई, जिसके 19 वें पाइंंट ने किसानों में संशय की स्थिति पैदा कर दी है. इसमें यह लिखा गया है कि कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत धान फसल पर आदान सहायता राशि प्रति क्विंटल के स्थान पर प्रति एकड़ के मान से प्रदान करने का निर्णय लिया गया है. विज्ञप्ति की इसी बात को न तो कृषि मंत्री समझा पा रहे हैं और ना ही विभाग के आला अधिकारी.

कैबिनेट की इसी ब्रीफिंग के आधार पर कुछ समाचार माध्यमों में इस आशय की खबर प्रकाशित कर दी गई है कि अब किसान यदि प्रति एकड़ 21 क्विंटल से कम धान बेचता है तो भी उसे 21 क्विंटल के हिसाब से ही अंतर की राशि का भुगतान सरकार द्वारा किया जायेगा. इससे ऐसे किसानों को फायदा होगा, जो कम उत्पादन के कारण बिचौलियों से महंगे में धान खरीदकर सहकारी समितियों में बेचते थे और इस प्रक्रिया में अंतर की राशि का बंटवारा किसानों और बिचौलियों के बीच होता था. इसलिये बिचौलियों का प्रभाव समाप्त करने के लिये सरकार ने प्रति एकड़ फसल के आधार पर अंतर की राशि देने का फैसला लिया है.

कृषि सचिव ने नहीं उठाया फोन

कुछ समाचार माध्यमों में छपी इस खबर की पुष्टि के लिए जब लल्लूराम डॉट कॉम ने कृषि सचिव और कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेसी को फोन किया तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया.

धान खरीदी पुरानी नीति के तहत होगी : कृषि मंत्री

लल्लूराम डॉट कॉम ने कृषि मंत्री रामविचार नेताम से बात की तो उन्होंने इस पर अनभिज्ञता जाहिर करते हुए कहा कि धान खरीदी पुरानी नीति के तहत होगी और इसमें किसी भी तरह का नीतिगत बदलाव नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि कम उत्पादन होने या प्रति एकड़ 21 क्विंटल से कम बेचने पर किसानों को 21 क्विंटल का बोनस देने का कोई निर्णय सरकार ने नहीं लिया है. नेताम ने कहा कि इस पर सरकार विचार कर रही है और यह अभी प्रक्रियाधीन है.

कम धान बेचने पर भी प्रति एकड़ 21 क्विंटल का बोनस मिलेगा : राजस्व मंत्री

उधर सरकार के राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने फेसबुक पर एक पोस्ट किया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि सीएम विष्णुदेव साय ने किसानों के हित में मास्टर स्ट्रोक खेलते हुए बिचौलियों का प्रभाव खत्म कर दिया है और अब किसानों को कम धान बेचने पर भी प्रति एकड़ 21 क्विंटल का बोनस सीधे किसान के खाते में आयेगा. राजस्व मंत्री के इस पोस्ट ने किसानों को और कन्फ्यूज कर दिया है. उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि कृषि मंत्री रामविचार नेताम की बात सही है या फिर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा की..

फैसले के बारे में कोई जानकारी नहीं : सांसद संतोष पांडेय

इस बीच लल्लूराम डॉट कॉम ने भाजपा के मुख्य प्रवक्ता सांसद संतोष पांडेय से भी इस बारे में बातचीत की तो उन्होंने भी कैबिनेट के इस फैसले पर अनभिज्ञता जाहिर की और कहा कि इस तरह की चर्चा चल तो रही थी, लेकिन फैसले के बारे में फिलहाल उन्हें कोई जानकारी नहीं है.

सरकार को दिया गया था सुझाव : खाद्य आयोग अध्यक्ष

वहीं खाद्य आयोग के अध्यक्ष संदीप शर्मा, जो कि खुद एक बड़े किसान हैं उन्होंने कहा कि एक प्रेजेंटेशन बनाकर सरकार को सुझाव दिया गया था कि प्रति एकड़ के हिसाब से पूरा बोनस दिये जाने से भी सरकार को प्रति वर्ष चार से पांच हजार करोड़ रुपये का फायदा होने की बात बताई गई थी और इस पर सैद्धांतिक सहमति भी जताई गई थी. संदीप शर्मा ने कहा कि फैसले की विस्तृत जानकारी अभी उन तक नहीं पहुंची है.

जानिए कांग्रेस ने क्या कहा?

कुल मिलाकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है. मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भी अपुष्ट खबरों के आधार पर विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि किसानों को प्रति एकड़ की बजाय प्रति क्विंटल के हिसाब से बढ़े हुए समर्थन मूल्य के आधार पर आदान राशि जारी किया जाना चाहिये. किसानों के अलावा सरकार के मंत्री, सत्ताधारी दल के प्रवक्ता, विपक्ष सभी इस मामले में कन्फ्यूजन के शिकार नजर आते हैं, इसलिये सरकार को जल्द स्थिति स्पष्ट करना चाहिये, जिससे अर्नब तूफान का मुकाबला कर रहे किसानों को मानसिक राहत मिल सके.

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