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‘तुष्टिकरण की राजनीति के लिए कांग्रेस ने वंदे मातरम के टुकड़े किए, जिन्ना के सामने घुटने टेके…,’ Vande Mataram चर्चा के दौरान पीएम मोदी बोले- INC मुस्लिमों को खुश करने के लिए MNC बनी

3 months ago
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PM Modi On National Song Vande Mataram: राष्ट्र गीत वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर संसद के शीतकालीन सत्र (Parliament Winter Session) के सातवें दिन आज लोकसभा में इसपर चर्चा हो रही है। बहस की शुरुआत पीएण नरेंद्र मोदी ने की। बहस के दौरान उन्होंने तुष्टिकरण की राजनीति के लिए वंदे मातरम के टुकड़े करने का आरोप कांग्रेस पर लगाया। पीएम ने कहा कि तुष्टीकरण की राजनीति के दबाव में कांग्रेस और जवाहर लाल नेहरू मुस्लिम लीग (Muslim League ) और जिन्ना (Jinnah) के सामने घुटने टेक दिए। इसलिए कांग्रेस को एक दिन भारत के बंटवारे के लिए भी झुकना पड़ा। कांग्रेस ने आउससोर्स कर लिया है, दुर्भाग्य से कांग्रेस की नीतियां वैसी की वैसी ही है। इसी का नतीजा है कि आईएनसी (INC- Indian National Congress) अब एमएनसी (MNC- Muslim National Congress) हो गई है।

पीएम मोदी ने कहा कि पिछली सदी में वंदे मातरम् के साथ विश्वासघात हुआ. इसे विवादों में घसीटा गया। मुस्लिम लीग ने इसका विरोध किया। जिन्ना ने 1937 में इसका विरोध किया। नेहरू ने मुस्लिम लीग की निंदा नहीं की। जिन्ना के विरोध के बाद नेहरू को कुर्सी का खतरा लगा। जिन्ना के विरोध के बाद नेहरू को डर लगा। वंदे मातरम् के कुछ शब्दों पर मुस्लिमो को ऐतराज था। कांग्रेस ने इसकी समीक्षा की बात की। जिन्ना के विरोध के बाद नेहरू ने 5 दिनों बाद नेताजी को चिट्ठी लिखी और जिन्ना के विरोध पर सहमति जताई। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् की आनंद मठ वाली बात मुस्लिमों को खराब लग सकती है। बाद में वंदे मातरम् पर कांग्रेस ने समझौता कर लिया। उसके टुकड़े कर दिए गए. कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के सामने घुटने टेक दिए।

पीएम ने कहा कि जिन-जिन के साथ कांग्रेस जुड़ा है, वे वंदे मातरम् पर विवाद खड़ा करते हैं। जब कसौटी का काल आता है, तभी यह सिद्ध होता है कि हम कितने दृढ़ है, कितने सशक्त हैं। 1947 में देश आजाद होने के बाद देश की चुनौतियां बदली, प्राथमिकताएं बदली, लेकिन बारात पर जब-जब संकट आए, देश हर बार वंदे भारत की भावना के साथ आगे बढ़ा। आज भी 15 अगस्त 26 जनवरी को हर तरफ वह भाव दिखता है

पीएम मोदी ने बंकिम चंद्र चटर्जी को किया याद

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने बहस की शुरुआत करते हुए कहा कि जिस मंत्र ने, जिस जयघोष ने देश की आजादी के आंदोलन को ऊर्जा दी थी, प्रेरणा दी थी, त्याग और तपस्या का मार्ग दिखाया था, उस वंदे मातरम का पुण्य स्मरण करना हमारा सौभाग्य है। गर्व की बात है कि वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बन रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ”देश आत्मनिर्भर बने। 2047 में विकसित भारत बनाकर रहें। इस संकल्प को दोहराने के लिए वंदे मातरम बहुत बड़ा अवसर है। वंदे मातरम की इस यात्रा की शुरुआत बंकिम चंद्र जी ने 1875 में की थी। गीत ऐसे समय लिखा गया था जब 1857 में स्वतंत्रता संग्राम के बाद अंग्रेज सल्तनत बौखलाई हुई थी। भारत पर जुल्म जारी था. उस समय जो उनका राष्ट्रीय गीत था – ‘गॉड सेव द क्वीन’ – इसको घर घर पहुंचाने का षडयंत्र चल रहा था।

अंग्रेजो ने ‘बांटो और राज करो’ का रास्ता चुना

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ”वंदे मातरम का जन-जन से जुड़ाव था इससे ये हमारी स्वतंत्रता संग्राम की लंबी गाथा अभिव्यक्त होती है, जैसे किसी नदी की चर्चा होती है। उस नदी के साथ एक सांस्कृतिक धारा प्रवाह, एक विकास यात्रा का धारा प्रवाह उसके साथ जुड़ जाता है। क्या कभी किसी ने सोचा है कि आजादी की पूरी यात्रा वंदे मातरम की भावनाओं से जुड़ा था। ऐसा भाव काव्य शायद दुनिया में कहीं उपलब्ध नहीं होगा। अंग्रेज समझ चुके थे कि लंबे समय तक भारत में टिकना मुश्किल है।

 प्रधानमंत्री मोदी ने कहा – ‘अंग्रेजों की नाक में कर दिया था दम’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ”हमारे देश के बालक भी पीछे नहीं थे. छोटी छोटी उम्र में जेल में बंद कर दिया जाता, कोड़े मारे जाते थे। लगातार वंदे मातरम के लिए प्रभात फेरी निकलती थी। अंग्रेजों की नाक में दम कर दिया था। तब वहां बच्चे कहते थे – हे मां संसार में तुम्हारा काम करते और वंदे मातरम कहते जीवन भी चला जाए, तो वो जीवन भी धन्य है. ये गीत उन बच्चों की हिम्मत का स्वर था। बंगाल की गलियों से निकली आवाज देश की आवाज बन गई थी।

आजादी के लिए युवाओं का एक मंत्र था वंदे मातरम्

पीएम ने कहा- खुदीराम बोस, रोशन सिंह, राजेंद्र नाथ लहरी, रामकृष्ण विश्वाश जैसे अनगिनत नाम हैं, जिन्होंने वंदे मातरम् कहते-कहते फांसी के फंदे को अपने गले लगा लिया। जिन पर जुल्म हो रहे थे, उनकी भाषा अलग-अलग थी, लेकिन ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ इन सबका मंत्र था। गोपाल बाल जैसे युवाओं ने देश के लिए बलिदान दिया। मास्टर सुरसेन को 1934 में फांसी दी गई। तो उन्होंने अपने साथियों को पत्र लिख और उसमें एक ही शब्द था- वंदे मातरम्।

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