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झारखंड के सियासी संकट पर सीएम बघेल ने लगाए हार्स ट्रेडिंग के आरोप
रायपुर, 31 अगस्त 2022/ झारखंड में खड़े हुए राजनीतिक संकट को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी हॉर्स ट्रेडिंग कर रही है। इलेक्शन कमीशन ने कोई पत्र दिया है। एक सप्ताह हो गया है राजभवन से लिफाफा खुल ही नहीं रहा है। इसका मतलब है कि भीतरखाने कुछ पक रहा है। ऐसी स्थिति में विधायकों की सुरक्षा के लिए यहां लाए हैं। मुख्यमंत्री बुधवार सुबह शिमला रवाना होने से पहले रायपुर हवाई अड्डे पर प्रेस से बात कर रहे थे।
इससे पहले मुख्यमंत्री मंगलवार देर रात नवा रायपुर स्थित मेफेयर रिसॉर्ट में झारखंड के नेताओं से मिलने पहुंचे थे। वहां उन्होंने झारखंड के मौजूदा संकट पर बात की। कांग्रेस के झारखंड प्रभारी अविनाश पांडेय, प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर और मंत्री रामेश्वर उरांव ने कहा कि वे सभी एकजुट हैं। झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार को कोई खतरा नहीं है। यहां रिसॉर्ट में झारखंड की सत्ताधारी महागठबंधन के 32 मंत्री और विधायक डेरा डाले हुए हैं।
इसके बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा था कि, भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को कहीं भी विपक्षी दलों की सरकार खटक रही है। उसे गिराने के लिए वे हर संभव कोशिश में हैं। सभी को एकजुट रहने की जरूरत है। तभी उनकी चाल का मुकाबला किया जा सकता है। मुख्यमंत्री कुछ देर की बातचीत के बाद वापस लौट आए थे।
झारखंड के विधायकों-मंत्रियों की आवाभगत का जिम्मा फिलहाल नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष और प्रदेश कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल, छत्तीसगढ़ राज्य खनिज विकास निगम के अध्यक्ष गिरीश देवांगन और भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल के अध्यक्ष सुशील सन्नी अग्रवाल के पास है। संगठन के दूसरे लोगों को झारखंड के विधायकों-मंत्रियों तक जाने की इजाजत नहीं है।
केवल कांग्रेस-राजग कोटे के मंत्री आए हैं
झारखंड सरकार के महागठबंधन में झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल और सीपीआई-लिबरेशन शामिल है। वहां मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित कुल 11 मंत्री हैं। इनमें कांग्रेस कोटे से चार मंत्री हैं और राष्ट्रीय जनता दल के एकमात्र विधायक को भी मंत्री बनाया गया है। हेमंत सोरेन ने 30 अगस्त को जिन विधायकों को रायपुर भेजा है, उनमें पांच मंत्री हैं। इनमें कांग्रेस के डॉ. रामेश्वर उरांव, बन्ना गुप्ता, बादल पत्रलेख, आलमगिर आलम और राजद के सत्यानंद भोक्ता शामिल हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा कोटे का कोई मंत्री रांची छोड़कर नहीं आया है।
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