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शिक्षक दिवस : राजभवन में शिक्षकों का ये कैसा सम्मान ? शिक्षा विभाग ने खराब कर दिया नाम ! सम्मानित शिक्षक दुखी, संघ में नाराजगी

6 months ago
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रायपुर. छत्तीसगढ़ में शिक्षक सम्मान समारोह शिक्षा विभाग के कुछ अजीब हरकतों और निर्णयों से विवादों में आ गया है. राजभवन में जिस तरह सम्मान समारोह आयोजित हुआ उससे अब ये सवाल उठ रहे हैं कि ये शिक्षकों का कैसा सम्मान ? क्या शिक्षा विभाग ने खराब कर दिया सम्मान समारोह का नाम ?

दरअसल हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी शिक्षक दिवस के दिन राजभवन में शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया. समारोह में 64 उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया गया. लेकिन शिक्षा विभाग ने इस वर्ष कुछ ऐसा कर दिया कि शिक्षकों की गरिमामय सम्मान समारोह को लेकर विवाद खड़ा हो गया है.

ड्रेस कोड की अनिवार्यता

पहली बार ऐसा हुआ कि सम्मानित शिक्षकों के लिए शिक्षा विभाग ने ड्रेस कोड को अनिवार्य कर दिया. सभी पुरुष शिक्षकों को विभाग की ओर से कह दिया गया कि वे साहब लोगों की तरह से शूट-बूट में आएं और ड्रेस कलर एक रहे. इसी तरह से महिला शिक्षकों के लिए एक ही रंग की बार्डर वाली साड़ी अनिवार्य किया गया. गौरतलब है कि इससे पहले आयोजित समारोह में इस तरह की अनिवार्यता नहीं रही है.

शिक्षक खुद ही सम्मान-पत्र और स्मृति चिन्ह लेकर पहुँचे

हद तो तब और हो गई जब शिक्षक सम्मान समारोह शुरु होने से पहले अपनी जगह पर बैठे शिक्षकों के हाथों में सम्मान का सारा समान अधिकारियों ने थमा दिया. तो उसी दौरान ही अधिकारी खुद ही सम्मान-पत्र और स्मृति चिन्ह लेकर राज्यपाल के पास पहुँचे. और तो और उनके गले में शॉल भी पहले ही डाल दिया गया था. वहीं छत्तीसगढ़ के 4 विभूतियों की स्मृति से सम्मानित शिक्षकों को एक-एक कर राज्यपाल के पास आने दिया गया. अन्य सभी 60 शिक्षकों को समूहों में सीधे तस्वीरों के लिए राज्यपाल के समक्ष खड़ा कर दिया गया.

शिक्षकों पर कई तरह की पाबंदिया

यही नहीं शिक्षकों के लिए राजभवन में कई तरह की पाबंदियां भी लगा दी गई थी. जैसे- कोट पहंने, लेकिन टाई नहीं. जो टाई पहनकर पहुंचे थे, उनकी टाई उतरवाई गई. सम्मानपूर्वक न तो बुलाया और न ही ठहराया गया. हास्टल में की गई रुकने की व्यवस्था. मोबाइल पूरी तरह बंद रखना है. फोन किसी तरह की तस्वीरें नहीं लेनी है.

शिक्षक संघ में भारी नाराजगी

राजभवन में आयोजित इस तरह के सम्मान समारोह को लेकर सम्मानित शिक्षकों और संघ में भारी नाराजगी है. शालेय शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष वीरेन्द्र दुबे का कहना है कि राजभवन में इस तरह का सम्मान समारोह पहले कभी नहीं हुआ. शिक्षकों पर ड्रेस कोड की अनिवार्यता डालना एक तरह वित्तीय बोझ डालना है. शिक्षकों के लिए शालीन पहनावा होना चाहिए, लेकिन शूट-बूट की अनिवार्यता नहीं होनी चाहिए. यही नहीं शिक्षकों के लिए सम्मान उनकी जीवन भर की असल पूंजी होती है. राज्यपाल के हाथों सम्मानित होने का गौरव एक यादगार पल होता है. लेकिन इस पल को समूहों में बांट देना मुझे लगता सही नहीं है. पहले कभी इस तरह की कोई परपंरा नहीं रही है. राष्ट्रपति शिक्षक सम्मान हो या पद्म सम्मान समारोह यहाँ भी ड्रेस कोड की अनिवार्यता नहीं रहती और न ही समूहों में सम्मान किया जाता है. उन्होंने कहा कि राज्यपाल, मुख्यमंत्री, स्कूल शिक्षा मंत्री को इस विषय पर तत्काल संज्ञान लेना चाहिए. ताकि आने वाले वर्ष इस तरह का अव्यवहारिक निर्णय या कृत्य न हो.

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