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छत्‍तीसगढ़ के कांगेर घाटी नेशनल पार्क में कल से शुरू होगा पक्षी सर्वेक्षण, 11 राज्यों के 56 विशेषज्ञ होंगे शामिल

3 years ago
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छत्‍तीसगढ़ के कांगेर घाटी नेशनल पार्क में कल से शुरू होगा पक्षी सर्वेक्षण, 11 राज्यों के 56 विशेषज्ञ होंगे शामिल

जगदलपुर, 24 नवंबर 2022/ संतोषप्रद, अवर्णनीय एवं बेजोड़ प्राकृतिक अनुभव का स्थल कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में पहली बार पक्षी सर्वेक्षण किया जाएगा। 25 से 27 नवंबर तक होने वाले इस सर्वेक्षण में देश के 11 राज्यों जिनमें छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, गुजरात, केरल, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, राजस्थान आदि के 56 पक्षी विशेषज्ञ शामिल होंगे। पक्षी सर्वेक्षण के लिए राष्ट्रीय उद्यान में 18 कैंप बनाए गए हैं। छत्तीसगढ़ शासन, बर्ड काउंड इंडिया एवं वाइल्ड लाइफ आफ छत्तीसगढ़ के सहयोग से सर्वेक्षण कार्य को प्रस्तावित किया गया है।

उल्लेखनीय है कि पहाड़ी मैना को छत्तीसगढ़ में राजपक्षी का दर्जा दिया गया है। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान पहाड़ी मैना का सबसे प्रमुख रहवास क्षेत्र है। माना जा रहा है कि राष्ट्रीय उद्यान प्रबंधन की सहायता से इस सर्वेक्षण से इको-टूरिज्म में बर्ड वाचिंग के नए अध्याय खुलेंगे।

कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के निदेशक धम्मशील गणवीर ने बताया कि पक्षी सर्वेक्षण से बस्तर ही नहीं प्रदेश में पर्यटन के क्षेत्र को बढ़ावा देने में काफी मदद मिलेगी। जगदलपुर मध्य भारत के जैव विविधता का एक अनोखा खजाना है। जिला मुख्यालय जगदलपुर से 27 किलोमीटर दूर दरभा मार्ग पर स्थिति कांगेर घाटी अपने प्राकृतिक सौंदर्य जैव विविधता रोमांचक गुफाओं के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है।

यहां भारत के पश्चिमी घाट एवं पूर्वीय हिमालय में पाए जाने वाले पक्षियों को भी देखा गया है। देश के विभिन्न परिदृश्यों में पाए जाने वाले पक्षियों का कांगेर घाटी से संबंध एवं उनके रहवास को समझने का प्रयास समय-समय पर विशेषज्ञों द्वारा किया गया है। इसी कड़ी में एक प्रयास कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में पक्षी सर्वेक्षण के जरिए किया जा रहा है। सर्वेक्षण में कांगेर घाटी के अलग-अलग पक्षी रहवासों का निरीक्षण कर यहां पाए जाने वाले पक्षियों की जानकारी एकत्र की जाएगी।

1982 में मिला था राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा

प्रकृति के इस अनोखे उपहार के संरक्षणार्थ कांगेर आरक्षित वन को जुलाई 1982 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया था। इसका क्षेत्रफल करीब 200 वर्ग किलोमीटर है। राष्ट्रीय राजमार्ग-30 इसी के बीच से होकर गुजरता है। राष्ट्रीय उद्यान घोषित करने का प्रमुख उद्देश्य जंगल एवं मृतप्राय घटकों को पुनर्जीवित कर हर हाल में इसे सुरक्षा प्रदान कर वन्यजीवों के लिए बेहतरीन शरण स्थल प्रदान कर पर्यटकों एवं प्रकृति प्रेमियों के लिए महत्वपूर्ण आकर्षण का केंद्र बनाना था। जिसमें काफी हद तक सफलता मिली है। उल्लेखनीय है कि विश्व प्रसिद्ध कुटुमसर की सारगर्भित प्राकृतिक गुफा, तीरथगढ़ जलप्रपात इसी राष्ट्रीय उद्यान में स्थित हैं। इनके अलावा भी प्रकृति के कई अनमोल उपहार एवं धरोहर कांग्रेस घाटी राष्ट्रीय उद्यान में अवस्थित हैं।

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