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भानुप्रतापपुर उपचुनाव : लखमा को सर्व आदिवासी समाज ने प्रचार करने से रोका, मंत्री के सामने सरकार के खिलाफ की नारेबाजी


कांकेर, 23 नवंबर 2022/ भानुप्रतापपुर विधानसभा उपचुनाव में आरक्षण में कटौती को लेकर सर्व आदिवासी समाज की नाराजगी एक बार फिर सामने आ गई। दरअसल, भानुप्रतापपुर के ग्राम पंचायत बोगर में चुनाव प्रचार में गए छत्तीसगढ़ सरकार में मंत्री कवासी लखमा को आदिवासी समाज के विरोध का सामना करना पड़ा। कांग्रेस प्रत्याशी सावित्री मांडवी के समर्थन में प्रचार करने गए मंत्री को आदिवासियों ने प्रचार करने से रोक दिया।
आदिवासी समाज ने कहा, आदिवासियों के अधिकार का विरोध करने वाला हमारा नेता हो ही नहीं सकता है। इसी बीच आदिवासियों ने मंत्री लखमा के सामने ही सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। इस दौरान समाज के लोगों की मंत्री लखमा के बीच बहस भी हुई। मालूम हो कि छत्तीसगढ़ में आदिवासियों का आरक्षण 12 प्रतिशत कम होने से आदिवासी संगठन नाराज हैं।
आदिवासियों के आरक्षण में कटौती का विरोध करने के लिए आदिवासी समाज ने विधानसभा क्षेत्र की सभी 85 पंचायतों से एक-एक प्रत्याशी को मैदान में उतारने की योजना बनाई थी। 42 पंचायतों से एक एक अभ्यर्थी ने नामांकन पत्र भी खरीदा था। हालांकि सभी ने नामांकन दाखिल नहीं किया।
समाज के प्रतिनिधियों में 15 का नामांकन सही दस्तावेजों के साथ जमा नहीं करने के खारिज हो गया। नामांकन पत्र की जांच के बाद 21 प्रत्याशी मैदान में थे, लेकिन आखिरी समय में कांग्रेस के रणनीतिकारों ने आदिवासी समाज के 11 सदस्यों को अपने पाले में कर लिया। अन्य ने मैदान छोड़ दिया। अब मैदान में सिर्फ सात प्रत्याशी है। मुख्य मुकाबला कांग्रेस की सावित्री मंडावी व भाजपा के ब्रम्हानंद नेताम के बीच ही बचा है। आदिवासी समाज के बैनर पर अब एक ही प्रत्याशी पूर्व आइपीएस अकबर राम कोर्रार चुनाव मैदान में हैं। सर्व आदिवासी समाज के पदाधिकारी उन्हें ही वोट देने की शपथ दिला रहे हैं।